RBI ने भारत से डॉलर की निकासी रोकने के लिए किया कई उपायों का ऐलान, आइए डालते हैं इन पर एक नजर

अब 15-साल,30-साल और 40-साल के सरकारी बॉन्ड के सभी नए इश्यू'फुल्ली एक्सेसिबल रूट'(FAR) का हिस्सा होंगे। इस कैटेगरी के बॉन्ड तीन ग्लोबल इंडेक्स में शामिल हैं। दूसरी सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश की सीमाएं भी हटा दी जाएंगी

अपडेटेड Jun 05, 2026 पर 1:22 PM
किसी भी एक कंपनी में पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम में निवेश सीमा 5% से बढ़ाकर 10% की गई है। इसके लिए FEMA नियमों में बदलाव का नोटिफिकेशन जल्द जारी होगा

भारत सरकार और आरबीआई ने देश में और ज्यादा डॉलर लाने और इसकी निकासी को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाए गए हैं जब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भारतीय इक्विटी से रिकॉर्ड निकासी के कारण रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 5 प्रतिशत कमजोर हुआ है। वर्तमान में डॉलर के मुकाबले रुपया 95-96 रुपए प्रति डॉलर के आसपास दिख रहा है। आइए इन उपायों पर डालें एक नजर।

अब 15-साल,30-साल और 40-साल के सरकारी बॉन्ड के सभी नए इश्यू'फुल्ली एक्सेसिबल रूट'(FAR) का हिस्सा होंगे। इस कैटेगरी के बॉन्ड तीन ग्लोबल इंडेक्स में शामिल हैं। दूसरी सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश की सीमाएं भी हटा दी जाएंगी। नॉन-रेसिडेंट इंडियन (NRI) और ओवरसीज सिटिजन्स ऑफ इंडिया (OCI) के निवेश की सीमाएं बढ़ाई जा रही हैं और इन्हें भारत के बाहर रहने वाले सभी व्यक्तियों तक बढ़ाया जा रहा है।

RBI 30 सितंबर तक लगभग चार महीनों के लिए रियायती फॉरेक्स स्वैप की सुविधा देगा। इसके साथ ही पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSU) द्वारा बाहरी कमर्शियल बॉरोइंग(ECB)को भी बढ़ावा दिया जाएगा। RBI बैंकों को 3 से 5 साल की FCNRB डिपॉजिट जुटाने के लिए 30 सितंबर तक पूरी हेजिंग लागत उठाने की वैसी ही सुविधा देगा। RBI एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई की वसूली की समय-सीमा को फिर से नौ महीने कर देगा।


सरकार ने भी उठाए ये कदम

केंद्र सरकार ने 5 जून को इनकम-टैक्स (संशोधन)अध्यादेश 2026 जारी कर दिया है। इसके तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली ब्याज आय और कैपिटल गेन्स पर टैक्स चुकाने से छूट दी गई है। यह अध्यादेश 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा,जिससे इसका फायद मौजूदा टैक्स ईयर की शुरुआत से ही मिल सकेगा। देश में FPIs का निवेश बढ़ाने के लिए सरकार ने ये बड़ा कदम उठाया है। G-Sec और Sovereign Green Bonds में निवेश आसान बनाया गया है।

अब G-Sec में FPIs के लिए कोई निवेश सीमा नहीं होगी। FPIs को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने अब तक लागू 3 शर्तें खत्म कर दी हैं। FPI की शॉर्ट-टर्म लिमिट और कंसंट्रेशन लिमिट हटा दी गई है। जनरल और लॉन्ग टर्म कैटेगरी भी मर्ज कर दी गई है। Fully Accessible Route का दायरा बढ़ाते हुए G-SECS में FIIs को कैपिटल गेन्स टैक्स में छूट दी गई है।

सरकार ने FIIs टैक्स छूट पर अध्यादेश जारी कर दिया है। अब FIIs को सरकारी बॉन्ड्स (G-Secs) इंट्रेस्ट इनकम पर भी टैक्स छूट मिलेगी। G-SECS में FIIs को कैपिटल गेन्स टैक्स छूट मिलेगी। G-SECS पर कैपिटल गेन्स टैक्स की यह छूट 1 एक अप्रैल से लागू होगी। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को भी G-SECS कैपिटल गेन्स टैक्स छूट मिलेगी।

इसके अलावा NRIs के लिए शेयर बाजार में निवेश सीमा बढ़ा दी गई है। सरकार जल्द ही इस पर नोटीफिकेशन जारी करेगी। अब ये पोर्टफोलियो निवेश स्कीम में निवेश कर सकेंगे। शेयर बाजार में NRIs निवेश सीमा 5%से बढ़कर 10% की गई है। कुल PROI (Persons Resident Outside India)निवेश सीमा 10% से बढ़कर 24% की गई है। NRIs के अलावा OCIs की निवेश सीमा भी बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

किसी भी एक कंपनी में PIS (पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम) में निवेश सीमा 5% से बढ़ाकर 10% की गई है। इसके लिए FEMA नियमों में बदलाव का नोटिफिकेशन जल्द जारी होगा।

भारत के सरकारी बॉन्ड्स में निवेश पर विदेशी निवेशकों को मिलेगी टैक्स से छूट, अध्यादेश हुआ जारी

आरबीआई गवर्नर के ऐलान

आज आरबीआई पाॉलिसी जारी करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी कहा कि डॉलर इनफ्लो और बाजार में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए अहम कदम उठाए गए हैं। NRI डिपॉजिट में बड़ा फ्लो आने की उम्मीद है। इन खबरों के चलते रुपए में मजबूती बढ़ी। आज डॉलर के मुकाबले रुपया 50 पैसे मजबूत हुआ है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।