इन 10 मिड और स्मॉलकैप फंड्स ने 5 सालों में दिया लार्जकैप्स से बेहतर रिटर्न, क्या इनमें से किसी में है आपका निवेश?
पिछले 5 सालों के दौरान, मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स ने लार्जकैप फंड्स के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, पूरी कटेगरी में मज़बूत रिटर्न मिलने के बावजूद, केवल कुछ ही स्कीमें अपने बेंचमार्क को मात देने में सफल रहीं हैं
एक और बात जो साफ तौर पर सामने आती है, वह यह है कि हाल के दिनों में ये फ़ंड काफी वोलेटाइल रहे हैं। बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले सभी 5 स्मॉलकैप फ़ंड्स ने अच्छे लॉन्ग टर्म ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद, पिछले छह महीनों में नेगेटिव रिटर्न दिए हैं
पिछले कुछ महीनों बाजार में उतार-चढ़ाव (volatility) बढ़ने के साथ ही कई निवेशकों ने फिर से लार्जकैप फंड्स की ओर रुख करते नजर आए हैं। मिडकैप्स और स्मॉलकैप्स में भी हाल ही में काफी गिरावट आई है। पहले इनमें जबरदस्त तेज़ी देखने को मिली थी। लेकिन अगर आप पिछले कुछ महीनों के बजाय पिछले पांच सालों पर नज़र डालें, तो तस्वीर काफ़ी बदली नजर आती है।
लॉन्ग टर्म में मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स ने लार्जकैप फंड्स से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। असल में, इन कैटेगरी के कुछ फंड्स ने पांच सालों में लार्जकैप फंड्स के औसत रिटर्न से लगभग दोगुना रिटर्न दिया है। लेकिन इसमें भी एक दिलचस्प पेंच भी है। असल में बहुत कम ही फंड ही अपने बेंचमार्क को मात दे पाए हैं।
लार्ज कैप के रिटर्न काफ़ी कम
अगर हम पिछले पांच सालों के प्रदर्शन पर नज़र डालें तो पता चलता है कि औसतन लार्जकैप फंड ने 5 सालों में 11.71 प्रतिशत का रिटर्न दिया। इसकी तुलना में मिडकैप फंड्स ने 17.95 प्रतिशत और स्मॉलकैप फंड्स ने 18.88 प्रतिशत का औसत रिटर्न दिया है। यह एक काफी बड़ा अंतर है।
जब आप इन कैटेगरीज़ में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंड्स को देखते हैं, तो यह अंतर और भी ज़्यादा साफ़ हो जाता है। कई मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स ने 5 सालों में 21–22 प्रतिशत से ज़्यादा का सालाना रिटर्न दिया है। हालांकि,कैटेगरी के मज़बूत रिटर्न के बावजूद हर मिडकैप और स्मॉलकैप फंड ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है।
बहुत कम फंडों ने अपने बेंचमार्क को दिया मात
हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप कैटेगरी ने कुल मिलाकर अच्छा रिटर्न दिया है। लेकिन 5 सालों में सिर्फ़ कुछ ही फंड अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन कर पाए हैं। 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के असेट वाले 29 मिडकैप फंड्स में से सिर्फ़ 7 ही Nifty Midcap 150 TRI से बेहतर रिटर्न देने में कामयाब रहे हैं।
स्मॉलकैप्स के 28 फंड्स में से सिर्फ़ 11 ही Nifty Smallcap 250 TRI से बेहतर प्रदर्शन कर पाए हैं। इसलिए, जहां ब्रॉडर मार्केट कैटेगरीज़ में निवेशित रहने वाले निवेशकों को फायदा हुआ, वहीं सही फंड चुनने से मुनाफे में बहुत बड़ा फ़र्क पड़ा है।
एक और बात जो साफ तौर पर सामने आती है, वह यह है कि हाल के दिनों में ये फ़ंड काफी वोलेटाइल रहे हैं। बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले सभी 5 स्मॉलकैप फ़ंड्स ने अच्छे लॉन्ग टर्म ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद, पिछले छह महीनों में नेगेटिव रिटर्न दिए हैं। यह इस बात की याद दिलाता है कि स्मॉलकैप में निवेश करना शॉर्ट टर्म के लिए मुश्किल भरा हो सकता है, भले ही लंबे समय के रिटर्न कितने ही शानदार क्यों न दिखते हों।
यही ट्रेंड मिडकैप में भी दिखा। हालांकि इस कैटेगरी ने लार्जकैप की तुलना में लॉन्ग टर्म में मजबूत रिटर्न दिया, लेकिन हाल ही में कई फंड्स का परफॉर्मेंस एक जैसा नहीं रहा है। इसका एक अच्छा उदाहरण मोतीलाल ओसवाल मिडकैप फंड है। पिछले 5 सालों में 22.82 प्रतिशत के सालाना रिटर्न के साथ यह सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला मिडकैप फंड रहा। लेकिन पिछले छह महीनों में इसमें 12.55 प्रतिशत की गिरावट आई और एक साल में 3.85 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
यह विरोधाभास ब्रॉडर मार्केट में निवेश की स्थिति को काफी अच्छी तरह से दर्शाता है जिसमें लंबे समय में मिलने वाला रिटर्न तो काफी अच्छा हो सकता है, लेकिन यह सफर शायद ही कभी आसान होता है।
निष्कर्ष
कुल मिला कर आंकड़ों से पता चलता है कि ब्रॉडर मार्केट में हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद पिछले 5 सालों में मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स ने लार्ज-कैप फंड्स की तुलना में काफी ज्यादा कमाई कराई है। लेकिन, इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि इस कैटेगरी में अच्छे रिटर्न के बावजूद बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन की गारंटी नहीं है, जिससे फंड का चुनाव करना भी एसेट एलोकेशन जितना ही अहम हो जाता है।
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