Sensex-Nifty Slips: अमेरिका में एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बन रहे हैं, इस खुलासे पर एक काराबोरी दिन पहले घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 एक-एक फीसदी से अधिक उछल गए थे। हालांकि आज पिछले कारोबारी दिन की अधिकतर तेजी गायब हो गई। इसकी एक बड़ी वजह तो ये है कि मार्केट की नजरें फिलहाल फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक है। सेंसेक्स आज 836.34 प्वाइंट्स यानी 1.04 फीसदी की फिसलन के साथ 79,541.79 और निफ्टी 50 भी 284.70 प्वाइंट्स यानी 1.16 फीसदी की गिरावट के साथ 24,199.35 पर बंद हुआ है। पीएसयू बैंक को छोड़ निफ्टी के सभी सेक्टर के इंडेक्स रेड जोन में हैं और पीएसयू बैंक का भी निफ्टी इंडेक्स फ्लैट ही बंद हुआ है। सबसे अधिक दबाव मेटल, आईटी, ऑटो, रियल्टी और फार्मा शेयरों में दिखा। ट्रंप की धमाकेदार वापसी के अगले दिन भारतीय स्टॉक मार्केट में गिरावट की अहम वजहों के बारे में यहां बताया जा रहा है।
अमेरिकी फेड के फैसले का इंतजार
जैसे रेपो रेट को लेकर भारतीय केंद्रीय बैंक आरबीआई की एमपीसी के बैठक के फैसले का इंतजार मार्केट को रहता है, वैसे ही अमेरिकी फेड के भी फैसले का इंतजार मार्केट कर रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों पर फैसला लेने वाला है और माना जा रहा है कि इस बार ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती हो सकती है। निवेशकों की नजर फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के भाषण पर भी रहेगी ताकि आने वाले समय में इंटेरेस्ट रेट को लेकर फेड किस रास्ते पर बढ़ेगा, इसका संकेत मिल सके।
इसे लेकर जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर वीके विजयकुमार का कहना है कि ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' की रणनीति अमेरिकी इकॉनमी को मजबूत कर सकती है। हालांकि वीके विजयकुमार का यह भी कहना है कि अगर वह चीन से आयात पर 60 फीसदी और बाकी देशों से आयात पर 10-20 फीसदी का टैरिफ लगाते हैं तो महंगाई बढ़ सकती है और फेड की महंगाई पर काबू पाने की नीति संकट में पड़ जाएगी। ऐसे में अमेरिकी फेड रेट में कटौती की नीति पर फिर से विचार कर सकता है। ऐसा हुआ तो दुनिया भर के स्टॉक मार्केट को झटका लगेगा।
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
आज 7 नवंबर को रुपया नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। ट्रंप सरकार के दौरान आने वाले महीने में डॉलर की मजबूती के आसार ने रुपये पर दबाव बनाया है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली थम नहीं रही है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 4,445.59 करोड़ रुपये के शेयरों की नेट बिक्री की। इसने मार्केट का माहौल खराब किया। पिछले महीने FIIs ने 94,000 करोड़ रुपये की नेट सेल्स की थी।
चीन में राहत पैकेज के आसार
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन आने वाले वर्षों में 10 लाख करोड़ युआन यानी 117.79 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने पर विचार कर रहा है। 8 नवंबर को चीन में एनपीसी स्टैंडिंग कमेटी की 14वीं बैठक है। इस बैठक में इस पर विचार हो सकता है। इस बैठक में किसी बड़े प्रोत्साहन पैकेज पर फैसले की उम्मीद पर चीन का CSI 300 इंडेक्स और हॉन्ग कॉन्ग का हैंगसैंग इंडेक्स 1-1 फीसदी से अधिक उछल गया। अब निवेशकों की नजरें इस बैठक के नतीजे पर है।
कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर रही हैं। कई कंपनियों के नतीजे उम्मीद से काफी कमजोर आ रहे हैं, जिसके चलते माहौल खराब हुआ है। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि इक्विटी मार्केट को कुछ सेक्टर्स में सुस्त कमाई का झटका लग रहा है।
ट्रंप की नीतियों का हो रहा इंतजार
अगर अमेरिकी राष्ट्रपति ऐसी कोई नीति अपनाते हैं जिससे चीन को झटका लगता है तो इसका फायदा भारत को मिल सकता है। इससे दोनों देशों के बीच कारोबार और रणनीतिक साझेदारी के नए मौके खुलेंगे। हालांकि ट्रंप अमेरिका से निर्यात होने वाली चीजों पर भारत के हाई टैरिफ रेट को लेकर आलोचना कर चुके हैं। टैरिफ को लेकर अगर ट्रंप कुछ निगेटिव करते हैं तो भारतीय कारोबार को झटका भी लग सकता है। ऐसे में मार्केट को ट्रंप की नीतियों का इंतजार है।
ट्रंप की जीत के बाद 6 नवंबर को आईटी शेयरों में ताबड़तोड़ तेजी आई लेकिन फिर ट्रंप के शासन में अमेरिका फर्स्ट की नीति को प्रमुखता की आशंका पर आज 7 नवंबर को ये टूट गए। चुनावी नतीजे के बाद डाऊ और एसएंडपी 500 दोनों में ही एक-एक फीसदी से अधिक की तेजी आई जो नवंबर 2022 के बाद से सबसे तेज उछाल है और नास्डाक ने भी फरवरी के बाद की सबसे बड़ी छलांग लगाई। इसके बावजूद भारतीय मार्केट में एमफेसिस, एलटीआईमाइंडट्री और टेक महिंद्रा समेत कई आईटी शेयर आज करीब 3 फीसदी तक टूट गए। आशंका ये है कि ट्रंप सरकार में अमेरिकी आईटी कंपनियों को अमेरिकियों को प्रमुखता देने की बात हुई तो भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई फीकी पड़ सकती है जो अमेरिकी क्लाइंट्स को सॉफ्टवेयर निर्यात करते हैं।
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