Trump Tariff Pause : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में कई देशों पर रेसीप्रोकल टैरिफ लगाकर बाजार में हड़कंप मचा दिया। इसके बाद से भारत समेत दुनिया भर के बाजारों में जोरदार बिकवाली शुरु हो गई। बीच-बीच में अलग-अलग सेक्टर पर टैरिफ बढ़ाने के संकेत देने से भी दुनिया भर के बाजारों में कोविड महामारी के दौरान आई मंदी जैसी मंदी का दौर देखने को मिला। चीन ने ट्रंप के टैरिफ पर जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान करके टैरिफ वार शुरु कर दिया। लेकिन अब ट्रंप ने अपने देश पर जवाबी टैरिफ नहीं लगाने वाले देशों पर 90 दिनों के लिए रेसीप्रोकल टैरिफ पर रोक लगाने की घोषणा के साथ बाजारों को सुकून लेने का मौका दिया है। ट्रंप के इस कदम को एक्सपर्ट्स ने अमेरिकी की मोल-भाव की रणनीति यानी कि नेगोशिएशन स्ट्रेटेजी करार दिया है। जबकि दूसरे एक्सपर्ट का मानना है कि चीन के मुकाबले भारत को इस टैरिफ वार से फायदा होगा।
टैरिफ रोलबैक ये US की नेगोशिएशन स्ट्रेटेजी है
PRIME SECURITIES के एमडी एन जयकुमार ने हमारे सहयोगी चैनल सीएनबीसी-आवाज़ से बातचीत में कहा कि ट्रंप के टैरिफ का उद्देश्य बैलेंस शीट को संतुलित करना है। इस समय अमेरिका के पास टैरिफ रोलबैक के अलावा कोई विकल्प नहीं था। ट्रंप ने यील्ड दरों में कमी के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ को हथियार बनाया। लेकिन US में स्ट्रक्चरल बदलाव लाना आसान नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप अपने फैसलों पर कायम नहीं रहते। टैरिफ लगाना और फिर उस पर रोक लगाना ये US की नेगोशिएशन स्ट्रेटेजी है। चीन और US के टैरिफ वॉर में भारत का फायदा होगा। लेकिन मार्केट में जोखिम की स्थिति बनी हुई है। मार्केट की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल है। हमें ओवरसीज एक्सचेंज रेट्स पर नजर रखनी होगी। इस टैरिफ वार का NBFCs, बैंकिंग पर टैरिफ का कोई असर नहीं होगा। लेकिन NBFCs से ज्यादा बैंकिंग सेक्टर पर भरोसा है। RBI के कदमों से बैंकिंग को काफी सपोर्ट मिला।
टैरिफ वॉर में भारत का फायदा होगा
WHITE OAK GROUP के फाउंडर प्रशांत खेमका ने सीएनबीसी-आवाज़ से कहा कि ट्रंप बातों को नाटकीय ढंग से और बढ़ा चढ़ाकर दुनिया के सामने रखते हैं। ट्रंप के मुताबिक विश्व के देश अमेरिका का शोषण कर रहे हैं। रेसिप्रोकल टैरिफ से अमेरिका ने अपनी स्थिति मजबूत की है। US के खिलाफ कई देशो ने अनुपातहीन टैरिफ लगाए थे। रेसिप्रोकल टैरिफ रोलबैक अमेरिका की सोची समझी रणनीति है।
वर्ल्ड ट्रेड में टैरिफ का फायदा चीन लेता रहा है। चीन का अमेरिका से बातचीत का तरीका सहीं नहीं है। लेकिन टैरिफ वॉर में भारत का फायदा होगा। बाकी देशों के मुकाबले भारत बेहतर स्थिति में है। लेकिन मैक्रो जोखिम लेने से फिलहाल बचना होगा। बैलेंस पोर्टफोलियो बेहद जरूरी है। खेमका ने आगे कहा कि वोलैटिलिटी शेयर मार्केट का एक पार्ट है है। मार्केट में उतार-चढ़ाव पहले भी रहा है और आगे भी रहेगा।
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