Tube Investments of India का शेयर 10% गिरा, किन वजहों से जबरदस्त बिकवाली

Tube Investments of India Share Price: मैनेजमेंट ने कहा कि रेलवे बिजनेस शुरू होने में देरी हुई है। इंजन डिवीजन के एक नए प्लांट में मशीन सप्लायर्स के साथ चुनौतियों के कारण 6 से 9 महीने की देरी हो रही है। दिसंबर 2025 तिमाही में स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 17.6 प्रतिशत बढ़ गया

अपडेटेड Feb 05, 2026 पर 5:31 PM
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Tube Investments of India ने ₹2 प्रति इक्विटी शेयर का अंतरिम डिविडेंड भी घोषित किया है।

मुरुगप्पा ग्रुप की कंपनी ट्यूब इनवेस्टमेंट्स ऑफ इंडिया लिमिटेड के शेयर 5 फरवरी के कारोबार में लगभग 10 प्रतिशत तक टूटे। बीएसई पर कीमत 2380.80 रुपये पर बंद हुई। दिन में शेयर 10.5 प्रतिशत तक गिरकर 2358.35 रुपये के लो तक गया। कंपनी का मार्केट कैप गिरकर 46000 करोड़ रुपये रह गया है।अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही को लेकर हुई पोस्ट अर्निंग्स कॉन्फ्रेंस कॉल में कंपनी के मैनेजमेंट की ओर से सामने आई डिटेल के बाद शेयर में बिकवाली का दबाव दिखा।

मैनेजमेंट ने कहा कि रेलवे बिजनेस शुरू होने में देरी हुई है। प्रोटोटाइप सैंपल मार्च और अप्रैल के बीच मिलने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2027 इस बिजनेस के लिए बेहतर रहने की उम्मीद है। मैनेजमेंट ने उम्मीद जताई है कि हेवी व्हीकल्स और थ्री-व्हीलर EV सेगमेंट अगले 12 से 18 महीनों में ब्रेकइवन पर पहुंच जाएंगे, यानि कि न नफा न नुकसान की स्थिति बन जाएगी। उसके बाद छोटे कमर्शियल व्हीकल्स और ट्रैक्टर का नंबर आएगा। EV बिजनेस में मैनेजमेंट ने माना कि मौजूदा कंपनियां लॉन्च और फीचर्स में ज्यादा आक्रामक हो गई हैं, खासकर थ्री-व्हीलर सेगमेंट में।

शांति गियर्स बिजनेस के मामले में मैनेजमेंट का मानना है कि बाजार ज्यादा प्रतिस्पर्धी है। इसके कारण ऑर्डरबुक में चुनौतियां आ रही हैं। लेकिन कंपनी रेवेन्यू के बजाय मार्जिन को प्राथमिकता देती है। शांति गियर्स का मुनाफा घटकर ₹23 करोड़ हो गया है।


इंजन डिवीजन में 6-9 महीने की देरी

इंजन डिवीजन के एक नए प्लांट में मशीन सप्लायर्स के साथ चुनौतियों के कारण 6 से 9 महीने की देरी हो रही है। मैनेजमेंट ने कहा कि इंजीनियरिंग बिजनेस के मामले में यूरोप में डिमांड कम है। वहीं अमेरिकी बाजार में 50% टैरिफ है। इससे एक्सपोर्ट ग्रोथ में रुकावट आ रही है। ट्यूब इनवेस्टमेंट्स मैनेजमेंट ने यह भी कहा कि TI क्लीन मोबिलिटी बिजनेस बनाना उम्मीद से ज्यादा चुनौती भरा था। लेकिन अब क्षमता बन गई है, और सुधार के संकेत दिख रहे हैं।

आगे कहा कि 3xper कॉन्ट्रैक्ट, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और ऑर्गेनाइजेशन (CDMO) बिजनेस को आंध्र प्रदेश में अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बनाने में 18 महीने से ज्यादा की महत्वपूर्ण देरी का सामना करना पड़ा। इसकी वजह है कि परमिशन और रजामंदी हासिल करने में कठिनाइयां थीं। प्रोडक्शन अगले तीन महीनों में शुरू होने की उम्मीद है, जिसके बाद एक लंबा सर्टिफिकेशन साइकिल चलेगा।

L34A ई-स्कूटर प्रोडक्ट अभी कुछ चुनिंदा मार्केट में टेस्टिंग फेज में है ताकि प्रोडक्ट की स्वीकार्यता और कीमत का पता लगाया जा सके। इसके भविष्य और मार्केट में इसे लाने की रणनीति पर अगली तिमाही में फीडबैक मिलने के बाद फैसला लिया जाएगा।

Tube Investments of India के तिमाही नतीजे

ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स का अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 17.6 प्रतिशत बढ़कर 189 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 160.7 करोड़ रुपये था। रेवेन्यू 12.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2152 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA सालाना आधार पर 27 प्रतिशत बढ़कर 309 करोड़ रुपये हो गई। कंपनी का मार्जिन पिछले साल की इसी अवधि के 12.7% से बढ़कर 14.3% हो गया। ट्यूब इनवेस्टमेंट्स ऑफ इंडिया ने ₹2 प्रति इक्विटी शेयर का अंतरिम डिविडेंड भी घोषित किया है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 10 फरवरी, 2026 है।

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