अमेरिका-ईरान की बातचीत नाकाम! जानिए स्टॉक मार्केट, तेल और रुपये पर क्या होगा असर
अमेरिका-ईरान के बीच 21 घंटे की बातचीत नाकाम हो गई। इसका असर कच्चे तेल से लेकर शेयर बाजार और रुपये तक पर दिख सकता है। एक्सपर्ट्स से जानिए सोमवार, 13 अप्रैल के कारोबारी सत्र में इन तीनों का रुख कैसा रहेगा।
सोमवार, 13 अप्रैल को बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी दिखने का अनुमान लगाया जा रहा है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में करीब 21 घंटे बातचीत चली। हालांकि, दोनों देशों के बीच कोई भी समझौता नहीं हो सका। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने अपना 'आखिरी और सबसे अच्छा प्रस्ताव' रखा था। लेकिन ईरान ने साफ संकेत दिया कि अभी और बातचीत की जरूरत है।
इससे यह भी सवाल खड़ा हो गया कि दो हफ्ते का सीजफायर कितना टिकाऊ रहेगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि तनाव आगे भी बना रह सकता है।
कच्चे तेल में तेजी का संकेत
सोमवार, 13 अप्रैल को बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी दिखने का अनुमान लगाया जा रहा है। XM ऑस्ट्रेलिया के CEO पीटर मैकग्वायर का कहना है कि शुरुआत में तेल कुछ डॉलर तक उछल सकता है और पहले ही दिन बाजार में तेज उतार-चढ़ाव रहेगा।
मैकग्वायर के मुताबिक- अब तेल में फिर से तेजी का रुख बन सकता है। अगले 24 से 48 घंटे में कीमतें 100 डॉलर के करीब पहुंचने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान की अलग-अलग बातों से बाजार में कन्फ्यूजन बढ़ रहा है। इससे अनिश्चितता में और इजाफा हो रहा है।
शेयर बाजार पर क्या असर होगा?
जहां तेल में तेजी की अनुमान है, वहीं शेयर बाजार के लिए तस्वीर थोड़ी संतुलित है। उतार-चढ़ाव जरूर रहेगा, लेकिन फिलहाल बड़ी गिरावट की आशंका कम मानी जा रही है।
सोहम एसेट मैनेजर्स के संजय पारेख का कहना है कि स्थिति अभी बदलती हुई है, लेकिन बाजार को लगता है कि अमेरिका पर समझौता करने का दबाव ज्यादा है। उनके मुताबिक बाजार पूरी तरह कमजोर नहीं होगा और फिलहाल न्यूट्रल रुख में रह सकता है।
गिरावट आए तो क्या करें
संजय पारेख का मानना है कि अगर बाजार में 3 से 5 प्रतिशत तक की गिरावट आती है, तो उसे निवेश के मौके के तौर पर देखा जा सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी सलाह दी कि निवेश एकदम से नहीं, बल्कि धीरे-धीरे करना बेहतर रहेगा, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
सेक्टर के हिसाब से असर
भारतीय बाजार पर इसका असर हर सेक्टर में एक जैसा नहीं होगा। तेल की कीमत बढ़ने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एविएशन और पेंट सेक्टर पर दबाव आ सकता है। वहीं, अपस्ट्रीम और एनर्जी कंपनियों को इससे फायदा मिल सकता है।
अगर तेल महंगा बना रहता है, तो इसका असर महंगाई और रुपये पर भी पड़ सकता है, जिससे बाजार में और हलचल बढ़ सकती है।
रुपये पर क्या होगा असर
एक्सपर्ट्स का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में संभावित तेजी का सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ सकता है। तेल महंगा होता है तो भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे डॉलर की मांग बढ़ेगी और रुपये पर दबाव आएगा।
ऐसे माहौल में रुपये में कमजोरी देखने को मिल सकती है, खासकर अगर ग्लोबल अनिश्चितता बढ़ती है। हालांकि, अगर हालात ज्यादा नहीं बिगड़ते और विदेशी निवेश बना रहता है, तो रुपये में गिरावट सीमित भी रह सकती है।
बातचीत जारी रहेगी
अमेरिका और ईरान के बीच बेशक कोई समझौता नहीं हुआ, लेकिन बातचीत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अमेरिका में भारत की पूर्व राजदूत मीरा शंकर का कहना है कि एक ही दौर में समझौता होना मुश्किल था और आगे भी बातचीत जारी रह सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्ष अभी साफ नहीं हैं कि आगे कैसे बढ़ेंगे, इसलिए अनिश्चितता बनी रहेगी और बाजार पर इसका असर दिखता रहेगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है और देशों को इसके लिए पहले से तैयारी करनी होगी।
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