US Market Crash: क्रूड में उछाल से अमेरिकी शेयर बाजार धड़ाम, करेक्शन जोन में पहुंचा नैस्डैक-100 इंडेक्स

US Stock Markets: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई की चिंता ने अमेरिकी शेयर बाजार को हिला दिया है। वाल स्ट्रीट पर आज 27 मार्च को भारी गिरावट देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और ईरान युद्ध के लंबा खींचने के संकेतों के चलते निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा। खासतौर से टेक शेयरों में काफी गिरावट देखने को मिली

अपडेटेड Mar 27, 2026 पर 10:40 PM
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US Stock Markets: ब्रेंट क्रूड का भाव शुक्रवार को 111 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया

US Stock Markets: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई की चिंता ने अमेरिकी शेयर बाजार को हिला दिया है। वाल स्ट्रीट पर आज 27 मार्च को भारी गिरावट देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और ईरान युद्ध के लंबा खींचने के संकेतों के चलते निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा। खासतौर से टेक शेयरों में काफी गिरावट देखने को मिली, जिससे नैस्डेक-100 इंडेक्स आधिकारिक तौर पर 'करेक्शन' जोन में पहुंच गया।

शुरुआती कारोबार में गिरावट

न्यूयॉर्क में सुबह 9:45 बजे के आसपास S&P 500 Index 0.6% गिरा हुआ था। यह इंडेक्स अब लगातार पांचवें साप्ताह गिरावट के साथ बंद होने की राह की ओर बढ़ रहा है। ये 2022 के बाद इस इंडेक्स का सबसे लंबा गिरावट का सिलसिला होगा।

वहीं, नैस्डैक 100 इंडेक्स 0.7% तक गिर गया। इसके साथ ही अब यह इंडेक्स अपने अक्टूबर के हाई से 10% से ज्यादा नीचे आ गया है। इसे आमतौर पर ‘करेक्शन’ कहा जाता है।


तेल की कीमतों में उछाल बना सबसे बड़ा कारण

अमेरिकी शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी से आया है। ब्रेंट क्रूड का भाव शुक्रवार को 111 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल की कीमतों में तेजी सीधे तौर पर शेयर बाजारों पर दबाव डालती है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा होता है और कंपनियों की लागत बढ़ जाती है।

ईरान-इजराइल तनाव ने बढ़ाई अनिश्चितता

पश्चिम एशिया में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने ग्लोबल बाजारों को हिला दिया है। दोनों देशों के बीच मिसाइल हमले जारी हैं, जबकि अमेरिका भी इस संकट में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांति वार्ता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त सैनिक भेजने पर भी विचार कर रहा है।

बॉन्ड यील्ड में तेजी से शेयर बाजार पर दबाव

अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.46% तक पहुंच गई है, जो निवेशकों के लिए एक और चिंता का कारण है। तेल की कीमतों में तेजी के कारण महंगाई बढ़ने का डर है, जिससे फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऊंची यील्ड निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित करती है, जिससे इक्विटी बाजार में निवेश कम हो जाता है।

फेड की चिंता और बढ़ी

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने भी आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई है। फेड गवर्नर लिसा कुक ने कहा कि तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई का जोखिम बढ़ गया है, जो रोजगार से ज्यादा बड़ी चिंता बन चुका है।

निवेशकों में बढ़ी घबराहट, वोलैटिलिटी बढ़ी

बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच Cboe वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX) भी बढ़कर करीब 30 के स्तर तक पहुंच गया है, जो निवेशकों के बीच डर और अस्थिरता को दर्शाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा हालात में बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है और शेयरों पर दबाव बना रह सकता है।

चीन-अमेरिका व्यापार तनाव ने भी डाला असर

इस बीच, चीन की कॉमर्स मिनिस्ट्री ने अमेरिका की ट्रेड नीतियों की जांच शुरू करने की घोषणा की है, जिससे ग्लोबल व्यापार को लेकर तनाव फिर से बढ़ने की आशंका है। यह कदम अमेरिकी जांच के जवाब में उठाया गया है, जिससे बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।

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