वैल्यूएशन गुरु अश्वथ दामोदरन (Aswath Damodaran) ने कहा कि वह ऐसी किसी भी फर्म को हाथ लगाना नहीं पसंद करेंगे, जिसमें सॉफ्टबैंक (Softbank) ने निवेश किया हो। सॉफ्टबैंक, दुनिया की जानी-मानी इनवेस्टमेंट फर्म है, लेकिन पिछले कुछ सालों में उसके पोर्टफोलियो ने भारी नुकसान झेला है। सीएनबीसी से बात करते हुए अश्वथ दामोदरन ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि मैं किसी ऐसी फर्म को छूना चाहूंगा, जिसे सॉफ्टबैंक पहले ही हाथ लगा चुकी है।" दामोदरन, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस में फाइनेंस के प्रोफसर हैं।
दामोदरन ने कहा, "पिछले 3-4 सालों में मुझे एक चीज समझ में आई है, बिजनेस को खड़ा करने के मामले में सॉफ्टबैंक का ट्रैक रिकॉर्ड सही नहीं है। ऐसे में अगर सॉफ्टबैंक मुझे कुछ खरीदने को कहता है, तो मैं उसे बचना चाहूंगा।"
दामोदरन ने ये बातें आर्म होल्डिंग्स (Arm Holdings) की लिस्टिंग के मौके पर कहीं, जो गुरुवार को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर पहले ही दिन अपने इश्यू प्राइस से करीब 25 फीसदी ऊपर उछल गया। इसके साथ ही कंपनी की वैल्यूएशन 65 अरब डॉलर पर पहुंच गई। सॉफ्टबैंक के पास इस कंपनी में IPO के बाद भी 90.6 फीसदी हिस्सेदारी है।
दामोदर की टिप्पणियों पर भारत की उन कंपनियों के बुरे प्रदर्शन को बताती है, जिनमें सॉफ्टबैंक ने निवेश किया हुआ है। इसमें पेटीएम (वन 97 कम्युनिकेशंस), ज़ोमैटो, पॉलिसीबाजार (पीबी फिनटेक), और डेल्हीवरी जैसी कुछ लिस्टेड कंपनियां भी हैं, जिनमें सॉफ्टबैंक बतौर शेयरधारक बनी हुई है। इनमें से किसी भी कंपनी ने लिस्टिंग के बाद अभी तक निवेशकों के लिए पैसे नहीं बनाया है। हालांकि हाल में कुछ कंपनियों के मुनाफे के राह पर आने के बाद उनमें रिकवरी जरूर आई है।
SoftBank की हालिया फाइलिंग से मनीकंट्रोल के जुटाए आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 30 जून के बीच इन कंपनियों में सॉफ्टबैंक की हिस्सेदारी की फेयर वैल्यू 54.4 करोड़ डॉलर बढ़ गई। इसमें से भी 40 करोड़ डॉलर जून तिमाही के दौरान बढ़ा है।
सॉफ्टबैंक ने हाल ही में इन कंपनियों की शेयरों में आए उछाल का लाभ उठाने के लिए पेटीएम और जोमैटो में धीरे-धीरे हिस्सेदारी बेचना शुरू किया है। सॉफ्टबैंक ने इस साल भारत में अभी तक कोई निवेश नहीं किया है।