BIG MARKET VOICE में बाजार पर चर्चा के लिए सीएनबीसी-आवाज़ के साथ जुड़े मार्केट एक्सपर्ट आनंद टंडन। उन्होंने आईटी सेक्टर पर बात करते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों से आईटी सेक्टर में तेजी देखने को मिल रही थी। ये तेजी इसलिए आई थी कि बाकी सेक्टर काफी भाग चुके थे ऐसे में आईटी में ही वैल्यूशएन सस्ते होने के कारण तेजी की गुंजाइश थी। आईटी में अभी भी कोई बेड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। अमेरिका का बाजार अभी भी ऐसी पोजीशन में नहीं है जिससे भारतीय आईटी कंपनियों को मिलने वाले ऑर्डर में कोई बड़ी बढ़त हो। अगर अमेरिका में मंदी आती है तो भारतीय आईटी कंपनियों के लिए मुश्किल बढ़ेगी। आईटी शेयरों के वैल्यूएशन भी आकर्षक नहीं दिख रहे हैं।
बाजार तेजी को जस्टीफाइ करना मुश्किल, सतर्क रहने की जरूरत
बाजार पर बात करते हुए आनंद टंडन ने कहा कि ग्लोबल मार्केट में येन कैरी ट्रेड कटने का रिस्क बना हुआ है। बाजार के लिए सिर्फ यही एक चुनौती नहीं है। अमेरिका में चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। वहां ग्रोथ धीमी पड़ने के संकेत मिल रहे हैं। भारत में भी कंपनियों की आय कमजोर रही है। पहली तिमाही के नतीजों में अर्निंग कमजोर रही है। वैल्यूएशन महंगे हैं। इसके बावजूद बाजार में तेजी है। बाजार की इस तेजी को जस्टीफाइ करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में हमें सतर्क रहने की जरूरत है।
बैंकों को क्रेडिट बांटने में बरतनी चाहिए सावधानी
बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर पर बात करते हुए आनंद टंडन ने कहा कि क्रेडिट में ग्रोथ देखने को मिल रही है लेकिन इकोनॉमी में सुस्ती के संकेत भी मिलने लगे हैं। ऐसे में देखना होगा कि क्रेडिट ग्रोथ कहां तक जाएगी। प्राइवेट सेक्टर से बहुत ज्यादा कैपेक्स नहीं हो रहा है। सरकार ही कर्ज ले रही है और सरकार ही विकास योजनाओं पर खर्च कर रही है। कंज्यूमर सेक्टर की बात करें तो शहरी इलाकों में कंज्यूमर कर्ज स्तर काफी हाई है। क्रेडिट कार्ड डेट इस समय अपने सबसे हाई लेवल पर चल रहा है। अगर आप ओवरऑल क्रोडिट ग्रोथ पर नजर डालें तो बैंकों को भी इस समय अपने क्रेडिट ग्रोथ को धीमा करने की जरूरत है। क्योंकि अभी उनका बैंलेंसशीट साफ है इसका मतलब ये नहीं है कि आगे जाकर एनपीए नहीं हो सकता है। बैंकों को भी क्रेडिट बांटने में सावधानी बरतनी चाहिए।
बैंकिंग शेयरों में निवेश के मौके
आनंद ने आगे कहा कि जहां तक डिपॉजिट की बात है तो इसे बढ़ाने के लिए बैंकों को इंटरेस्ट रेट बढ़ाना पड़ेगा। ऐसे में बैंकों के मार्जिंन पर दबाव रहेगा। इस स्थिति में ऐसे बैंक ज्यादा अहम हो जाते हैं जिनकी लाइबिलिटी प्रोफाइल अच्छी है और जिनके डिपॉजिट नेटवर्क अच्छी तरह से काम कर रहे हैं और जो टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में लीडिंग पोजीशन में हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए हमें प्राइवेट बैंकों की तरफ ही रुख करना होगा। अगर इन सब बातों को ध्यान में रखें तो इस समय दूसरे सेक्टरों की तुलना में बैंकिंग सेक्टर ही लंबी अवधि के निवेश के नजरिए से सबसे अच्छा नजर आ रहा है। क्योंकि दूसरे सेक्टर इस समय काफी महंगे दिख रहे हैं।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।