Vedanta Demerger: जब तक अनिल अग्रवाल की दिग्गज माइनिंग कंपनी वेदांता के कई अहम बिजनेसेज एक में ही थे तो निवेशकों को कोई दिक्कत नहीं थे और एक ही कंपनी के शेयरों में पैसे लगाकर इनके बिजनेसेज की ग्रोथ का फायदा उठाया जा सकता था। हालांकि अब आज इससे अलग होकर चार अहम बिजनेसेज की कंपनियां अलग लिस्ट हुई हैं। ऐसे में निवेशकों को दांव लगाने से पहले यह समझना अहम होगा कि किसमें पैसे लगाकर अच्छी कमाई की जा सकती है। बता दें कि वेदांता से अलग होकर चार कंपनियों- वेदांता (Vedanta Aluminium Metal), वेदांता पावर (Vedanta Power), वेदांता ऑयल एंड गैस (Vedanta Oil & Gas) और वेदांता आयरन एंड स्टील (Vedanta Iron & Steel) के शेयर आज लिस्ट हुए हैं और वेदांता के निवेशकों को वेदांता के एक शेयर के बदले में इन सभी कंपनियों के एक-एक शेयर मिले हैं।
Vedanta Demerger: एक्सपर्ट्स को ये कंपनियां पसंद
वेदांता के डीमर्जर को एनालिस्ट्स एक पीढ़ी में एक बार होने वाला रीस्ट्रक्चरिंग यानी बहुत ही बड़ा बदलाव मान रहे हैं। हालांकि अब सवाल ये उठता है कि इस रीस्ट्रक्चरिंग के बाद वेदांता समेत चार और कंपनियां भी लिस्ट हैं तो किस पर दांव शानदार है, इसे लेकर एनालिस्ट्स सबसे अधिक बुलिश एलुमिनियम बिजनेस को लेकर है। इसके बाद उनका सबसे अधिक बुलिश रुझान ऑयल एंड गैस यूनिट और फिर पावर बिजनेस पर है। ICICI सिक्योरिटीज के एनालिस्ट विकास सिंह और प्रीतिश उरुमकर के मुताबिक एलुमिनियम नया क्राउन ज्वेल बनकर उभरा है क्योंकि पश्चिमी एशिया में उथल-पुथल के चलते इसकी सप्लाई में उम्मीद से ज्यादा कमी आ सकती है।
Vedanta Aluminium में क्या है खास
अब सवाल ये उठता है कि वेदांता एलुमिनियम में आखिर इतना खास क्या है, तो इसकी वजह इसके तीन मजबूत पिलर्स- घरेलू मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी, वैश्विक स्तर पर लागत के मामले में फर्स्ट क्वाटाइल यानी सबसे कम लागत वाली कैटेगरी में जगह, और लगातार बढ़ रही पूरी तरह से इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन हैं। इसके अलावा इसके लॉर्ज कैप बनने की संभावना से भी इसे सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। लॉर्ज कैप में आने पर निवेश को लेकर यह म्यूचुअल फंडों के लिए आकर्षक हो सकता है।
मार्च 2026 तक कंपनी की एलुमिनियम उत्पादन क्षमता सालाना क्षमता 28.8 लाख टन थी। इसमें BALCO (भारत एलुमिनियम कंपनी लिमिटेड) की क्षमता को शामिल करने पर कंपनी की भारतीय बाजार में हिस्सेदारी लगभग 55% से 60% तक पहुंचती है। ब्रोकरेज फर्म ICICI सिक्योरिटीज के मुताबिक वेदांता एलुमिनियम अमेरिका, यूरोप, मिडिल ईस्ट, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में सबसे बड़ी एलुमिनियम उत्पादक के तौर पर अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए तैयार है, और इसकी योजना अपनी मौजूदा प्रोडक्शन क्षमता को दोगुना करके 60 लाख टन सालाना करने की है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा ने पिछले महीने वेदांता एलुमिनियम की लॉन्ग-टर्म रेटिंग को स्टेबल आउटलुक के साथ AA+ में अपग्रेड किया था। इक्रा का कहना है कि कंपनी के स्मेल्टर ग्लोबल कॉस्ट कर्व में टॉप क्वार्टाइल में है यानी कि यह दुनिया की अधिकतर कॉम्पटीटर्स की तुलना में कम लागत पर उत्पादन करती है। इक्रा के मुताबिक यह एक स्ट्रक्चरल फायदा है और कमोडिटी की कीमतों में गिरावट के दौरान भी मार्जिन को झटका नहीं लगता है। एलुमिना कैपेसिटी वित्त वर्ष 2026 में 20 लाख टन से बढ़कर 50 लाख टन सालाना हो गया, जिससे ग्रुप की एलुमिना की बड़ी जरूरत पूरी होने और कॉस्ट कॉम्पटिटिवनेस और मजबूत होने की उम्मीद है।
वेदांता से अलग होकर बनी चारों कंपनियों में सबसे अधिक कर्ज होगा लेकिन इसकी EBITDA भी सबसे ज्यादा होने की उम्मीद है। इक्रा के मुताबिक ईबीआईटीडीए के मुकाबले नेट कर्ज के करीब 1.3 गुना होने की उम्मीद है है जोकि पावर यूनिट से कम है। इससे पहली नजर में वेदांता एलुमिनियम का लेवरेज प्रोफाइल अधिक आकर्षक दिख रहा है। पिछले वित्त वर्ष 2026 में एलएमई एलुमिनियम के भाव मजबूत बने रहे और प्रति टन सालाना करीब 10% की बढ़त के साथ $2,771 के औसत भाव पर बना रहा और इक्रा के मुताबिक नियर टर्म में इसके मजबूत बने रहने के आसार हैं। वित्त वर्ष 2026 में एलुमिनियम सेगमेंट का प्रति टन OPBDITA उछलकर करीीब $1,158 पर पहुंच गया जो इक्रा के मुताबिक वित्त वर्ष 2027 में प्रति टन $1,250 के पार जा सकता है और OPBDITA के मुकाबले कुल कर्ज 1.5 गुने से भी कम रह सकता है। इसके अलावा मार्च 2026 तक वेदांता एलुमिनियम का कैश और लिक्विड इंवेस्टमेंट करीब ₹4980 करोड़ था और इक्रा के मुताबिक यह मीडियम टर्म के देनदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
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