Waaree Energies Share Price: सोलर कंपनी पर अमेरिकी एक्शन का असर, JM Financial ने घटाया टारगेट प्राइस

Waaree Energies Share Price: अमेरिका की जांच के बाद JM Financial ने Waaree Energies का टारगेट प्राइस घटा दिया है। हालांकि, ब्रोकरेज ने 'Add' रेटिंग बरकरार रखी है। जानिए अमेरिकी कार्रवाई, ऑर्डर बुक पर असर की पूरी जानकारी।

अपडेटेड Jun 30, 2026 पर 5:49 PM
Waaree Energies का शेयर मंगलवार को 2.35% की बढ़त के साथ 2,954 रुपये पर बंद हुआ।

Waaree Energies Share Price: ब्रोकरेज JM Financial ने सोलर कंपनी Waaree Energies के शेयर का टारगेट प्राइस घटा दिया है। अब उसने 12 महीने का टारगेट प्राइस 3,509 रुपये से घटाकर 3,185 रुपये रखा है। इसकी वजह अमेरिका की ओर से कंपनी पर सोलर सेल आयात में टैरिफ से बचने (Tariff Evasion) का आरोप लगना है।

हालांकि, ब्रोकरेज ने शेयर पर अपनी 'Add' रेटिंग बरकरार रखी है। मौजूदा भाव 2,954 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 231 रुपये या 7.8% की संभावित बढ़त की गुंजाइश बनती है।

अमेरिका ने क्या कहा?


अमेरिका की Customs and Border Protection (CBP) ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट में कहा है कि Waaree Energies ने 2021 से 2026 के बीच वियतनाम और मलेशिया से आने वाले सोलर सेल्स पर लगने वाले टैरिफ से बचने की कोशिश की।

CBP का कहना है कि कंपनी ने चार साल तक सामान के मूल देश (Country of Origin) की गलत जानकारी दी। JM Financial का मानना है कि इससे कंपनी की साख पर असर पड़ सकता है।

271% तक एंटी-डंपिंग ड्यूटी

CBP के फैसले के बाद जिन आयातों को नियमों से बचने वाला माना गया है, उन पर 271.28% तक एंटी-डंपिंग ड्यूटी के लिए कैश डिपॉजिट देना होगा। यह जांच 2025 में शुरू हुई थी।

शिकायत में कहा गया था कि Waaree Energies ने चीन से सोलर सेल का आयात काफी बढ़ाया। इसके बाद भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले क्रिस्टलाइन सिलिकॉन फोटोवोल्टिक (CSPV) मॉड्यूल का निर्यात भी तेजी से बढ़ा। 2021 से 2023 के बीच भारत से अमेरिका जाने वाले CSPV मॉड्यूल के आयात में 2,250% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ऑर्डर बुक पर पड़ सकता है असर

JM Financial के मुताबिक, Waaree Energies की ऑर्डर बुक 53,000 करोड़ रुपये की है। इसका 65% से 70% हिस्सा विदेशी ग्राहकों के लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़ा है।

ब्रोकरेज का मानना है कि इस फैसले से कंपनी की साख पर असर पड़ सकता है। इसका असर भविष्य में मिलने वाले कुछ अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स पर भी पड़ सकता है।

फिर भी 'Add' रेटिंग क्यों बरकरार?

JM Financial का कहना है कि हालात उतने खराब नहीं हैं, जितनी आशंका जताई जा रही थी। CBP ने कंपनी के सभी आयातों को नियमों का उल्लंघन करने वाला नहीं माना है।

जांच में यह भी सामने आया कि Waaree Energies ने गैर-चीनी सोलर सेल्स से इतने मॉड्यूल तैयार किए थे, जो अमेरिका भेजे गए उसके कुल मॉड्यूल की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त थे। इसी वजह से ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी पर असर तो पड़ेगा, लेकिन सबसे खराब स्थिति बनने की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है।

मार्च तिमाही में कैसा रहा प्रदर्शन?

FY26 की चौथी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 112% बढ़कर 8,840.25 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, शुद्ध मुनाफा 74.7% बढ़कर 1,126.26 करोड़ रुपये रहा। EBITDA 80% बढ़कर 1,577 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन घटकर 18.6% रह गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 23% था।

Waaree के शेयरों का हाल

Waaree Energies का शेयर मंगलवार को 2.35% की बढ़त के साथ 2,954 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने स्टॉक तकरीबन फ्लैट है। वहीं, 1 साल के दौरान इसमें करीब 6% की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैप 84.71 हजार करोड़ रुपये है।

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