सिंगापुर में आयोजित एक समिट के दौरान एक्सपर्ट्स का कहना था कि अगर फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है, तो यह ग्लोबल इनवेस्टर्स के लिए गेम चेंजर नहीं होगा। दरअसल, चीन का स्लोडाउन निवेशकों के दिमाग पर हावी रहेगा। इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट फर्म ब्रिजवॉटर एसोसिएट्स एलपी के फाउंडर रे डेलियो ने बताया कि फेडरल रिजर्व के फैसले से लॉन्ग टर्म में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि आखिरकार नीति निर्माताओं को आखिरकार रियल इंटरेस्ट रेट को कम रखना पड़ेगा।
डेलियो ने सिंगापुर में आयोजित मिल्केन इंस्टीट्यूट एशिया समिट 2024 के मौके पर एक टेलीविजन चैनल से बातचीत में कहा, 'फेडलर रिजर्व को ब्याज दर इतना ऊंचा रखना होगा, ताकि क्रेडिटर्स को रिटर्न को दिक्कत नहीं हो और डेटर्स को भी समस्या नहीं हो।' अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद जताई जा रही है। अमेरिका में ब्याज दर पिछले एक साल से भी ज्यादा से दो दशक के उच्च स्तर पर है।
बहरहाल, निवेशकों और एक्सपर्ट्स के बीच इस बात को लेकर अलग-अलग राय है कि ब्याज दर में 0.25 पर्सेंट की कटौती होगा या फिर 0.50 पर्सेंट की कटौती का ऐलान किया जाएगा। कैपिटल ग्रुप कंपनीज इंक के वाइस चेयरमैन जॉडी जॉनसन ने एक अलग इंटरव्यू में कहा, ' लॉन्ग टर्म प्लानिंग पर फोकस करना ज्यादा अहम है। खास तौर पर इक्विटी इनवेस्टर्स को 5 से 10 साल की अवधि को ध्यान में रखकर सोचने की जरूरत हैं।' उनका यह भी कहना था कि इससे उनके पोर्टफोलियो में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा।
केन इंटरनेशनल के CEO जॉनाथन गोल्डस्टेन ने बताया कि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में बढ़ोतरी उतना ही अहम है, जितना रियल एस्टेट इंडस्ट्री के लिए एंप्लॉयीज का ऑफिस लौटना। हालांकि, निवेशकों ने चीन में स्लोडाउन पर चिंताई, जिससे वहां की सरकार पर फिस्कल और मॉनिटरी पैकेज के ऐलान के लिए दबाव बढ़ रहा है, ताकि देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था 5 पर्सेंट का ग्रोथ टारगेट हासिल कर सके। डेलियो का कहना था कि उनके फैमिली ऑफिस के पोर्टफोलियो का छोटा सा हिस्सा चीन में निवेश किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन की अर्थव्यवस्था में वाकई में दिक्कतें हैं।