फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) पिछले काफी समय भारतीय बाजार में बड़ी बिकवाली कर रहे हैं। लेकिन, एक्सपर्ट का मानना है कि जैसे ही वैश्विक अस्थिरता कम होगी, वे एक बार फिर भारत लौट सकते हैं क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत रहने की उम्मीद है।
Geojit Financial Services के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वीके विजयकुमार को उम्मीद है कि जैसे ही मैक्रोइकोनॉमिक दबाव कम होंगे, FPI दोबारा निवेश की ओर लौट सकते हैं। उन्होंने कहा, 'अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ वॉर दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मंदी की ओर धकेल सकता है। इसके उलट भारत FY26 में करीब 6% की दर से बढ़ सकता है, जो इसे एक मजबूत विकल्प बनाएगा। यही तुलनात्मक मजबूती वैश्विक बाजारों में स्पष्टता आते ही विदेशी पूंजी को भारत की ओर खींच सकती है।'
विजयकुमार इस उथल-पुथल के लिए अमेरिका-चीन व्यापार तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में बढ़ी घबराहट को जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने बताया, 'FPI ने मार्च के अंत में थोड़ी खरीदारी शुरू की थी, लेकिन जब बाजार में फिर से अस्थिरता बढ़ी, तो उन्होंने दोबारा बिकवाली शुरू कर दी।'
लगातार 9वें दिन FPI की बिकवाली
शुक्रवार को भी FPI ने भारतीय शेयरों की बिक्री जारी रखी, जो अब लगातार नौवां दिन था। अप्रैल में अब तक कुल निकासी ₹35,641 करोड़ तक पहुंच चुकी है। इस साल की शुरुआत से अब तक FPI ₹1.74 लाख करोड़ की भारी बिकवाली कर चुके हैं।
शुक्रवार को जहां FPI ने ₹2,519 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की, वहीं DII ने ₹3,759 करोड़ की खरीदारी की।
ट्रंप की राहत से बाजार में उछाल
दिलचस्प बात यह रही कि शुक्रवार के दिन घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स में तेज़ उछाल आया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 70 से अधिक देशों (जिसमें भारत भी शामिल है) पर टैरिफ को जुलाई तक के लिए टाल दिया। इसके चलते BSE सेंसेक्स 1,310 अंक चढ़कर 75,157 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 429 अंक बढ़कर 22,828 पर बंद हुआ। इसमें बैंकिंग और ऑटो स्टॉक्स में मजबूत खरीदारी देखी गई।
Religare Broking के SVP अजीत मिश्रा का कहना है कि आने वाला सप्ताह संवेदनशील रह सकता है, क्योंकि अमेरिका-चीन का मुद्दा और तिमाही नतीजों का सीजन दोनों ही बाजार की दिशा तय करेंगे। इस हफ्ते Wipro, Infosys, HDFC Bank और ICICI Bank जैसे दिग्गज कंपनियों के नतीजे आने हैं।