स्टॉक मार्केट, डेट या फिर गोल्ड... अगर 1 लाख रुपये हैं, तो इस वक्त कहां करें निवेश?
Equity vs Debt vs Gold Investment: ईरान युद्ध और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि ₹1 लाख कहां निवेश करें। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इक्विटी, डेट और गोल्ड में कैसे निवेश करके कैसे बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सकता है।
इक्विटी यानी शेयर मार्केट को लंबे समय में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला निवेश माना जाता है।
Equity vs Debt vs Gold Investment: पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा तेजी ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है। निवेशक सभी एसेट में तेजी से मुनाफा वसूल रहे हैं और पैसों को सुरक्षित रखने की कोशिश में हैं। इसका असर सोना, शेयर बाजार और कमोडिटी पर साफ दिख रहा है। सभी में लगातार भारी उतार-चढ़ाव दिख रहा है।
ऐसे माहौल में बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी निवेशक के पास ₹1 लाख हों, तो उसे पैसा कहां लगाना चाहिए। क्या बाजार की गिरावट खतरा है या नया निवेश मौका? एक्सपर्ट की राय समझने से पहले अलग-अलग एसेट क्लास को समझना जरूरी है।
इक्विटी
इक्विटी यानी शेयर मार्केट को लंबे समय में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला निवेश माना जाता है। यह महंगाई से ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता रखता है, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव भी ज्यादा होता है।
यह उन निवेशकों के लिए बेहतर माना जाता है जो जोखिम लेने को तैयार हों और कम से कम 3 से 5 साल या उससे ज्यादा समय तक निवेश बनाए रख सकें।
डेट
डेट इंस्ट्रूमेंट निवेश में स्थिरता लाते हैं। इसमें आपका पैसा सरकार या किसी कंपनी को उधार दिया जाता है और बदले में तय ब्याज मिलता है। इनमें पैसा अपेक्षाकृत सुरक्षित रहता है और जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला भी जा सकता है।
हालांकि इनमें रिटर्न आम तौर पर इक्विटी से कम होता है। यह निवेश छोटे समय के लक्ष्यों के लिए और बाजार गिरने पर सुरक्षा देने के लिए उपयोगी माना जाता है।
गोल्ड
सोना को अक्सर सुरक्षा देने वाला एसेट माना जाता है। बाजार में अनिश्चितता, महंगाई या आर्थिक संकट के समय गोल्ड अच्छा प्रदर्शन कर सकता है।
इसी वजह से इसे पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखने वाले निवेश के तौर पर देखा जाता है।
₹1 लाख निवेश कैसे करें
Stockify के फाउंडर और सीईओ पियूष झुनझुनवाला के मुताबिक अगर उनके पास निवेश के लिए ₹1 लाख हों, तो वे इसे अलग-अलग एसेट क्लास में बांटेंगे। उनका कहना है कि एक संतुलित पोर्टफोलियो में इक्विटी, डेट और गोल्ड तीनों का मिश्रण होना चाहिए।
झुनझुनवाला सलाह देते हैं कि निवेशक अपने पोर्टफोलियो का 50 से 60% हिस्सा इक्विटी में, 20 से 30% डेट में और 10 से 20% गोल्ड में रखें। इससे ग्रोथ, स्थिरता और सुरक्षा तीनों का संतुलन बना रहता है।
Scripbox की राय
Scripbox के मैनेजिंग पार्टनर सचिन जैन कहते हैं कि अगर उनके पास आज ₹1 लाख निवेश के लिए हों, तो वे संतुलित एसेट एलोकेशन अपनाएंगे। उनके मुताबिक करीब ₹60,000 इक्विटी में लगाए जा सकते हैं, क्योंकि लंबे समय में संपत्ति बनाने के लिए इक्विटी जरूरी है।
करीब ₹30,000 डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किए जा सकते हैं। इससे लिक्विडिटी बनी रहती है और बाजार की अस्थिरता से कुछ सुरक्षा मिलती है। बाकी ₹10,000 गोल्ड में लगाए जा सकते हैं। इससे महंगाई के खिलाफ सुरक्षा मिलती है और समय के साथ पोर्टफोलियो को संतुलित करने में मदद मिलती है।
Choice Wealth की रणनीति
Choice Wealth के सीईओ निकुंज सराफ के मुताबिक अगर उनके पास ₹1 लाख निवेश के लिए हों, तो वे पोर्टफोलियो को इक्विटी की ओर झुकाव के साथ बनाएंगे, लेकिन पूरी तरह एक ही बाजार पर निर्भर नहीं रहेंगे।
उनकी रणनीति के मुताबिक 65% इक्विटी, 15% ग्लोबल इक्विटी, 10% गोल्ड और 10% डेट या मल्टी एसेट में निवेश किया जा सकता है।
निवेश का एक ही फॉर्मूला नहीं
FinEdge के को-फाउंडर और सीईओ हर्ष गहलौत का कहना है कि निवेश में एक ही रणनीति सभी के लिए सही नहीं होती। निवेश का सही बंटवारा बाजार की स्थिति से ज्यादा निवेशक के लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है।
अगर निवेश का समय लंबा है, तो पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा ज्यादा रखा जा सकता है। वहीं डेट और गोल्ड कम रखे जा सकते हैं। लेकिन अगर लक्ष्य नजदीक है, तो निवेश का बड़ा हिस्सा डेट में रखना बेहतर होता है। ऐसे में इक्विटी का हिस्सा कम किया जा सकता है। गोल्ड को पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन के लिए 10% तक रखा जा सकता है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।