होलसेल प्राइस इनफ्लेशन में सितंबर में तेज उछाल आया है। यह बढ़कर 11.39 फीसदी पर पहुंच गया। अगस्त में यह 9.92 फीसदी था। इसमें फ्यूल, फूड और मैन्युफैक्चर्ड गुड्स की कीमतों मे्ं उछाल का हाथ है। सरकार ने डब्ल्यूपीआई इनफ्लेशन के डेटा 14 अक्तूबर को जारी किए।
होलसेल इनफ्लेशन से चीजों की थोक कीमतों में बदलाव का पता चलता है
होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) से चीजों की थोक कीमतों में बदलाव का पता चलता है। WPI सितंबर में 112.5 पर पहुंच गया, जो अगस्त में 110.8 था। महीने दर महीने आधार पर यह 1.5 फीसदी का इजाफा है। आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) भी अगस्त के 110.8 से बढ़कर सितंबर में 112.5 पर पहुंच गया।
सितंबर में रिटेल इनफ्लेशन भी बढ़कर 5.5 फीसदी पर
रिटेल इनफ्लेशन पहले ही सितंबर में 5.5 फीसदी पर पहुंच गया है। इससे इस साल एक बार फिर इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद है। इस महीने की शुरुआत में आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की वृ्द्धि की थी। इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर की अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में भी इंटटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।
सितंबर में फ्यूल और पावर इनफ्लेशन में तेज उछाल
फ्यूल और पावर इनफ्लेशन सितंबर में बढ़कर 25.9 फीसदी पर पहुंच गया। अगस्त में यह 22.9 फीसदी था। कोल और लिग्नाइट इनफ्लेशन भी 1.6 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 9.3 फीसदी पर पहुंच गया। क्रूड पेट्रोलियम और नेचुरल गैस का इनफ्लेशन 34.4 फीसदी से बढ़कर 57.3 फीसदी पहुंच गया। मिनरल ऑयल इनफ्लेशन 38.5 फीसदी से बढ़कर 40 फीसदी हो गया।
मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का इनफ्लेशन भी बढ़ा
मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का इनफ्लेशन 8.4 फीसदी से बढ़कर 9.8 फीसदी पर पहुंच गया। डब्ल्यूपीआई बास्केट में इसकी करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी है। बेसिक मेटल्स के इनफ्लेशन में तेज उछाल दिखा। यह 10.9 फीसदी से बढ़कर 17 फीसदी हो गया। केमिकल्स और केमिकल्स प्रोडक्ट्स का इनफ्लेशन 14.3 फीसदी से बढ़कर 16.7 फीसदी हो गया।
फूड प्राइसेज में उछाल की वजह से भी बढ़ा WPI इनफ्लेशन
सितंबर में WPI इनफ्लेशन में फूड प्राइसेज में उछाल का भी हाथ रहा। डब्ल्यूपीआई फूड इंडेक्स में इनफ्लेशन अगस्त के 7.1 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 8.7 फीसदी हो गया। बीते कई महीनों में इसमें लगातार वृद्धि दिखी है। प्राइमरी फूड आर्टकिल्स का इनफ्लेशन 5.7 फीसदी से बढ़कर 8.1 फीसदी हो गया। मैन्युफैक्चर्ड फूड प्रोडक्ट्स में इनफ्लेशन थोड़ा कम हुआ। यह 9.7 फीसदी से घटकर 9.4 फीसदी पर आ गया।