Bajaj Auto Shares: महाराष्ट्र के ऐलान पर शेयर धड़ाम, 4% की गिरावट, ब्रोकरेज ने किया सतर्क

Bajaj Auto Shares: बजाज ऑटो के शेयरों को महाराष्ट्र सरकार के एक ऐलान से इतना तगड़ा शॉक लगा कि उसकी आंच शेयर मार्केट में भी महसूस हुई। इसके शेयर धड़ाम हो गए। जानिए महाराष्ट्र सरकार ने क्या ऐलान किया है जिसने इसके शेयरों को तोड़ दिया और ब्रोकरेज फर्म का क्या कहना है?

अपडेटेड Mar 11, 2026 पर 4:21 PM
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वैश्विक ब्रोकरेज फर्म यूएबएस ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि Bajaj Auto घरेलू मार्केट में तेल से चलने वाली जितनी तिपहिया गाड़ी बेचती है, उसका 17% महाराष्ट्र में बिकता है।

Bajaj Auto Shares: घरेलू स्टॉक मार्केट में आज बिकवाली के माहौल में बजाज ऑटो के शेयर महाराष्ट्र सरकार के ऐलान पर धड़ाम हो गए। महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-रिक्शा परमिट जारी करने पर अस्थायी रोक लगा दिया जो ब्रोकरेज फर्म यूबीएस के मुताबिक बजाज ऑटो के लिए तगड़ा झटका है। ऐसे में इस ऐलान की आंच में बजाज ऑटो के शेयर आज झुलस गए। हालांकि शुरुआती कारोबार में एक बार इसने ऊपर चढ़ने की कोशिश की लेकिन फिर धड़ाम हो गया और इंट्रा-डे हाई (₹9660.10) से करीब 4% टूट गया। अभी की बात करें तो आज बीएसई पर यह 2.96% की गिरावट के साथ ₹9322.25 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में यह 3.45% टूटकर ₹9275.00 तक आ गया था।

ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने बजाज ऑटो को ₹9,015 के टारगेट प्राइस के साथ सेल रेटिंग दी है। ओवरऑल बात करें तो इसे कवर करने वाले 46 एनालिस्ट्स में से 27 ने इसे खरीदारी की रेटिंग दी है तो 11 ने होल्ड और 8 ने सेल रेटिंग दी है।

Bajaj Auto को महाराष्ट्र सरकार के ऐलान से इस कारण झटका


वैश्विक ब्रोकरेज फर्म यूएबएस ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि बजाज ऑटो घरेलू मार्केट में तेल से चलने वाली जितनी तिपहिया गाड़ी बेचती है, उसका 17% महाराष्ट्र में बिकता है। वहीं कंपनी के ओवरऑल थ्री-व्हीलर वॉल्यूम में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 15% है। यूबीएस की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी के मार्जिन में इसकी हिस्सेदारी 30% से अधिक है। ऐसे में इस सेगमेंट पर कोई असर आता है तो कंपनी के मुनाफे पर झटका दिख सकता है। यूबीएस के मुताबिक महाराष्ट्र में जितनी ICE यानी तेल से चलने वाली तिपहिया बिकती है, उसमें 87% हिस्सेदारी बजाज ऑटो की है।

ऐसे में जब महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-रिक्शा परमिट जारी करने पर अस्थायी रोक लगाने का ऐलान किया तो इसे झटका लगा। सरकार का कहना है कि यह नीतिगत बदलाव है और यह विस्तार से "सैचुरेशन मैनेजमेंट" की तरफ एक कदम है। राज्य सरकार के अनुसार तिपहिया गाड़ियों की संख्या एक नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है, इसलिए यह फैसला लिया गया है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

बजाज ऑटो के शेयर पिछले साल 7 अप्रैल 2025 को ₹7088.25 पर थे जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 10 ही महीने में यह 43.71% उछलकर पिछले महीने 26 फरवरी 2026 को ₹10,186.60 के भाव पर पहुंच गया जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। अब कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न की बात करें तो दिसंबर 2025 तिमाही के आखिरी में इसमें प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 54.99% थी जबकि पब्लिक शेयरहोल्डिंग 44.92%। पब्लिक शेयरहोल्डर्स में बात करें तो 42 म्यूचुअल फंड्स के पास कंपनी की 7.05%,  18 बैंकों की 0.02% और 34 बीमा कंपनियों की 5.97% होल्डिंग है। एलआईसी की होल्डिंग 4.53% और विदेशी निवेशकों की 8.84% है।

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