Share Market Down: शेयर बाजार में इन 3 कारणों से गिरावट, सेंसेक्स 400 अंक टूटा, निफ्टी 22,850 के नीचे

Share Market Down: भारतीय शेयर बाजारों में लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद मंगलवार 7 अप्रैल को गिरावट लौटती दिख रही है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों शुरूआती कारोबार में 1 प्रतिशत तक लुढ़क गए। हालांकि बाद में बाजार ने अपने नुकसान को कुछ कम किया। मिडिल ईस्ट में जंग के और तेज होने के संकेतों ने निवेशकों के मनोबल को कमजोर बनाए रखा है

अपडेटेड Apr 07, 2026 पर 12:14 PM
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Share Market Down: विदेशी निवेशक अप्रैल में अब तक करीब 26,429 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं

Share Market Down: भारतीय शेयर बाजारों में लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद मंगलवार 7 अप्रैल को गिरावट लौटती दिख रही है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों शुरूआती कारोबार में 1 प्रतिशत तक लुढ़क गए। हालांकि बाद में बाजार ने अपने नुकसान को कुछ कम किया। मिडिल ईस्ट में जंग के और तेज होने के संकेतों ने निवेशकों के मनोबल को कमजोर बनाए रखा है। इसके अलावा क्रूड ऑयल के दाम में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से भी बाजार पर दबाव बना हुआ है।

सुबह 11.05 बजे के करीब, बीएसई सेंसेक्स 328.41 अंक या 0.44 फीसदी की गिरावट के साथ 73,778.44 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 103.85 अंक या 0.45 फीसदी लुढ़ककर 22,864.40 के स्तर पर आ गया था।

अधिकतर सेक्टोरल इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। निफ्टी ऑटो इंडेक्स 1.5 फीसदी तक लुढ़क गया। वहीं निफ्टी FMCG, रियल्टी और निफ्टी बैंक इंडेक्स भी 1 फीसदी से अधिक लुढ़क गए थे। निफ्टी आईटी इंडेक्स भी लाल निशान में बना हुआ था।


शेयर बाजार में आज की इस गिरावट के पीछे 3 बड़े कारण रहे-

1. अमेरिका–ईरान तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख दोहराते हुए चेतावनी दी कि अगर ईरान बुधवार सुबह 5:30 बजे (IST) तक समझौता नहीं करता, तो उसके पावर प्लांट्स और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए जा सकते हैं। यह दबाव होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर है। वहीं, ईरान ने साफ किया कि वह अस्थायी युद्धविराम नहीं, बल्कि संघर्ष का स्थायी समाधान चाहता है। अमेरिका और ईरान के इस नए रुख से युद्ध के और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे पूरे ग्लोबल मार्केट्स पर मंगलवार को दबाव दिखा।

2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल:

ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 112 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। तेल की ऊंची कीमतें भारत के इंपोर्ट बिल को बढ़ाती हैं और आर्थिक विकास के साथ-साथ कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डालती हैं। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई और इंपोर्ट लागत को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है।

3. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी शेयर बाजार की गिरावट में बड़ी भूमिका निभा रही है। एक दिन पहले 6 अप्रैल विदेशी निवेशकों ने करीब 8,167 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। अप्रैल महीने में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 26,429 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट्स वीके विजयकुमार का कहना है कि FPI की लगातार बिकवाली बाजार पर एक बड़ा दबाव बनी हुई है। उन्होंने कहा, “FPI की बिकवाली मुख्य रूप से शॉर्ट-टर्म कारणों से हो रही है, जैसे रुपये की कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर। हालांकि, इस स्थिति ने लंबे समय के निवेशकों के लिए अच्छी क्वालिटी वाले शेयरों में निवेश के अवसर भी पैदा किए हैं।”

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