Share Market Crash: शेयर बाजार में इन 5 कारणों से भारी गिरावट; सेंसेक्स 1100 अंक टूटा, निफ्टी 24,500 के नीचे
Share Market Fall: भारतीय शेयर बाजारों में एक दिन की राहत के बाद आज 6 मार्च को फिर से गिरावट लौट आई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक टूट गया। वहीं निफ्टी गिरकर 24,600 के नीचे चला गया। पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया हुआ है
Share Market Fall: निफ्टी के अधिकतर सेक्टरोल इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे
Share Market Fall: भारतीय शेयर बाजारों में एक दिन की राहत के बाद आज 6 मार्च को फिर से गिरावट लौट आई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,100 अंकों तक टूट गया। वहीं निफ्टी गिरकर 24,500 के नीचे चला गया। पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया हुआ है। इसके अलावा अमेरिकी शेयर बाजारों से कमजोर संकेत और एशियाई बाजारों में सुस्ती के कारण भी निवेशकों का भरोसा कम हुआ।
कारोबार के अंत में, बीएसई सेंसेक्स 1097 अंक या 1.37 फीसदी टूटकर 78,918.90 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 315.45 अंक या 1.27 फीसदी की गिरावट के साथ 24,450 के स्तर पर बंद हुआ।
निफ्टी के अधिकतर सेक्टरोल इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि आईटी, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में बढ़त देखी गई।
शेयर बाजार में आज की इस गिरावट के पीछे 5 बड़े कारण रहे-
1. बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कमजोर बनी हुई है। इस स्थिति से यह चिंता बढ़ गई है कि अगर ऊर्जा सप्लाई में बाधा आती है, तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ने और ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ पर असर पड़ने का खतरा भी है।
इनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इससे दुनिया में दोबारा महंगाई बढ़ने और आगे सख्त मॉनिटरी पॉलिसी लागू होने की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि इसी कारण ग्लोबल निवेशकों का रुख फिलहाल सावधानी भरा है और आने वाले समय में बाजार में निवेशक संभलकर और कम जोखिम के साथ निवेश करते नजर आ सकते हैं।
2. कमजोर ग्लोबल संकेत
एशियाई बाजारों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी दिख रहा है। साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1% से ज्यादा गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। वहीं, अमेरिका के शेयर बाजार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।
3. FIIs की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने 3,752.52 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं मार्च महीने में अब तक एफआईआई करीब 16,000 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं।
4. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
ब्रेंट क्रूड का कीमत गुरुवार को करीब 5% बढ़कर 86.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जो इसका पिछले 20 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं शुक्रवार सुबह करीब 9:15 बजे (IST) यह लगभग 84.4 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक कच्चे तेल की कीमतें करीब 16% बढ़ चुकी हैं। हालांकि उनका कहना है कि यह बढ़ोतरी पहले के बड़े भू-राजनीतिक संकटों की तुलना में अभी भी ज्यादा नहीं है। उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद तेल की कीमतें बढ़ी जरूर हैं, लेकिन यह उन बड़े उछालों जैसी नहीं है जो पहले बड़े अंतरराष्ट्रीय संकटों के समय देखने को मिले थे।
वीके विजयकुमार ने आगे कहा कि यह दिखाता है कि ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई काफी ज्यादा है। अगर पश्चिम एशिया का संकट कम होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें तेजी से गिर सकती हैं और शेयर बाजार फिर से उछाल दिखा सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
उनके मुताबिक, जब तक ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तब तक बाजार पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर कीमत 90 डॉलर से ऊपर जाकर 100 डॉलर की तरफ बढ़ती है, तो इसका असर दुनियाभर के बाजारों पर पड़ सकता है। इसलिए निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
5. बैंकिंग शेयरों में बिकवाली
बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भी आज तेज बिकवाली रही। कारोबार के दौरान, बैंक निफ्टी करीब 1 प्रतिशत तक गिर गया। इसके साथ ही निफ्टी PSU बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स भी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बैंकिंग शेयरों में कमजोरी की मुख्य वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को माना जा रहा है।
एनालिस्ट्स के मुताबिक भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। अगर महंगाई बढ़ती है तो RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की स्थिति में उधार लेने की लागत बढ़ी रहती है, जिसका असर बैंकिंग सेक्टर के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
चार्ट्स से क्या मिल रहे संकेत?
जियोजित इनवेस्टमेंट के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स के अनुसार, पिछले दिन का टारगेट हासिल करने के बाद निफ्टी में अब कुछ समय तक कंसॉलिडेशन देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि निफ्टी ने गुरुवार को 24,840 का लक्ष्य पूरा कर लिया, इसलिए आज बाजार थोड़ा स्थिर रह सकता है। हालांकि चार्ट पर बने मॉर्निंग स्टार कैंडलस्टिक पैटर्न से संकेत मिलते हैं कि बाजार में आगे भी तेजी जारी रह सकती है। ऐसे में निकट अवधि में 25,000, 25,150 और 25,480 के स्तर लक्ष्य हो सकते हैं।
वहीं उन्होंने यह भी कहा कि अगर निफ्टी 24,530 के ऊपर टिक नहीं पाता, तो यह तेजी वाला अनुमान कमजोर पड़ सकता है। ऐसे में निफ्टी फिर से 24,000 से 23,550 के स्तर की ओर जा सकता है।
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