
Paytm Share Prices: पेटीएम का शुद्ध घाटा मौजूदा वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में कुछ कम हुआ है, जिसके बाद इसके शेयरों (बाजार भाव: 616 रुपये, मार्केट कैप, 40,000 करोड़ रुपये) में पिछले कुछ दिनों में तेजी देखने को मिली है। दिसंबर तिमाही के बेहतर नतीजों से इसके शेयरों को राहत मिली है, जो नवंबर 2021 में अपनी लिस्टिंग के बाद से अबतक करीब 74 फीसदी गिर चुके हैं। वहीं इस दौरान इसके शेयरहोल्डरों की संपत्ति करीब 1 लाख करोड़ रुपये घट चुकी है। सबसे अहम यह रहा कि Paytm ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद पहली बार ऑपरेटिंग स्तर पर मुनाफा (ESOP लागत को हटाकर) दर्ज किया है, जो उसके तय लक्ष्य से करीब 3 तिमाही पहले है।
क्या Paytm के लिए दिसंबर तिमाही के नतीजे एक अहम मोड़ साबित हो सकते हैं और इससे भी जरूरी बात यह है कि क्या यहां से इसके शेयरों के अच्छे दिन शुरू होने वाले हैं? आइए सबसे पहले इसके नतीजों पर एक नजर डालते हैं।
दिसबंर तिमाही में ऑपरेटिंग प्रदर्शन हुआ बेहतर
फिनटेक सेक्टर की इस दिग्गज कंपनी का दिसंबर तिमाही में शुद्ध घाटा कम होकर 392 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी तिमाही में 779 करोड़ रुपये था। तिमाही आधार पर भी कंपनी के घाटे में कमी दर्ज की गई है।
चूंकि नए जमाने की कंपनियों का पहला ध्यान शुरुआती दिनों में रेवेन्यू बढ़ाने पर रहता है और मुनाफा लंबे समय तक दूर की कौड़ी बनी रह सकती है। ऐसे में यहां इसके ऑपरेटिंग प्रदर्शन को देखना ज्यादा समझदारी होगा।
दिसंबर तिमाही में Paytm की कारोबार से आय 42 फीसदी बढ़ी है। कंपनी ने बताया कि मर्चेंट सब्सक्रिप्शन से होने वाली आमदनी में बढ़ोतरी, लोन के अधिक वितरण और ई-कॉमर्स बिजनेस में गतिविधियां बढ़ने से दिसंबर तिमाही में उसे अपनी आय बढ़ाने में मदद मिली। यहां ध्यान देने वाले बात है कि पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में UPI इंसेंटिव के बिना भी रेवेन्यू ग्रोथ मजबूत थी। इस वित्त वर्ष की अगली तिमाही में भी यही दर्ज होने की संभावना है।
Paytm का GMV (ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू) दिसंबर तिमाही में 3.46 लाख करोड़ रुपये रहा और पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले यह 38 फीसदी बढ़ा है। GMV, फिनटेक कंपनियों के प्रदर्शन को मापने का एक प्रमुख पैमाना है और यह Paytm के प्लटेफॉर्म से एक खास समय-अवधि में मर्चेंट्स को हुए कुल पेमेंट्स की वैल्यू को बताता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि GMV में एक उपभोक्ता से दूसरे उपभोक्ता को हुए मनी ट्रांसफर और ऐसे दूसरे पेमेंट्स शामिल नहीं होते हैं।
कंपनी के लेंडिंग बिजनेस में दिसंबर तिमाही के दौरान मजबूत ग्रोथ देखी गई। इसके अलावा अधिक मार्जिन वाले ई-कॉमर्स बिजनेस और मर्चेंट्स को दिए जाने वाले क्लाउड सर्विस में भी अच्छी ग्रोथ रही। इन हाई-मार्जिन ऑफरों के चलते दिसंबर तिमाही में कंपनी का कंट्रीब्यूशन प्रॉफिट मार्जिन बढ़कर 51 फीसदी हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 31 फीसदी रहा था। कंट्रीब्यूशन प्रॉफिट एक पैमाना है, जो पेमेंट प्रॉसेसिंग चार्ज, प्रमोशनल कैश-बैक, इनसेंटिव और ऐसे दूसरे प्रत्यक्ष लागतों को घटाकर कारोबार से होने वाली आय को मापता है।
मुनाफा अभी भी दूर
कंट्रीब्यूशन मार्जिन के पॉजिटिव होने के बावजूद, Paytm को अप्रत्यक्ष लागतों के चलते दिसंबर तिमाही में घाटा उठाना पड़ा। अप्रत्यक्ष लागतों में कंपनी का मार्केटिंग पर होने वाला खर्च, एंप्लॉयी लागत और डेटा सेंटर्स व क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाला निवेश आता है।
पिछली तीन तिमाहियों से कंपनी का अप्रत्यक्ष खर्च (ESOP लागत को छोड़कर) 1,000 करोड़ रुपये के आस-पास स्थिर रहा है। अगर यह स्थिति आगे भी बनी रहती है, तो इससे कंपनी को ऑपरेटिंग स्तर पर लाभ मिल सकता है। क्योंकि कंपनी का रेवेन्यू अच्छी दर से बढ़ रहा है। ऐसे में इसे भविष्य में शुद्ध लाभ हासिल करने में मदद मिल सकती है। दिसंबर तिमाही के दौरान इस ऑपरेटिंग लाभ की एक झलक देखने को मिल भी चुकी है। दिसंबर तिमाही में कंपनी का अप्रत्यक्ष खर्च (ESOP लागत को छोड़कर) घटकर 49 फीसदी पर आ गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 58 फीसदी था।
हालांकि यहां ध्यान दिया जाना चाहिए कि कंपनी अपने ऑपरेटिंग EBITDA (अर्निंग बिफोर इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमॉर्टाइजेशन) को ESOP लागत से पहले दर्ज करती है। चूंकि ESOP भी एक तरह का कर्मचारी लागत है और ये लागत कारोबार का अभिन्न अंग है। खासतौर से एक स्टार्टअप के लिए। ऐसे में निवेशकों को ESOP लागत के साथ EBITDA को देखना चाहिए। फिलहाल अगले 3-4 सालों तक कंपनी की सालाना ESOP लागत 1,500 -1,600 करोड़ रुपये के ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना है।
दिलचस्प बात यह है कि IPO से पहले दिए गए ESOPs का 70 फीसदी हिस्सा कंपनी के फाउंडर और सीईओ विजय शेखर शर्मा के पास गया था। ये ESOP 9 रुपये के भाव पर दिए गए थे, जबकि कंपनी का आईपीओ 2,150 रुपये के भाव पर आया था। पिछले महीने ही प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म, इंस्टीट्यूशन इनवेस्टर एडवाइजरी सर्विसेज (IiAS) ने पेटीएम के ESOP को लेकर सेबी को लेटर लिखा था।
कुल मिलाकर, कंपनी ने दिसंबर तिमाही में ऑपरेटिंग स्तर पर (ESOP लागत को छोड़कर) मुनाफा दर्ज करने की सूचना दी है, लेकिन कंपनी को शुद्ध लाभ और फ्री कैश फ्लो हासिल करने में अभी भी कुछ समय लगेगा।
तेजी से बढ़ रहा लेंडिंग बिजनेस, लेकिन अभी जोखिम का टेस्ट होना बाकी
Paytm का बिजनेस मॉडल ग्राहकों और व्यापारियों को पेमेंट सॉल्यूशन ऑफर करना है। साथ ही वह उन्हें अधिक मार्जिन वाले फाइनेंशियल सेवाओं और क्लाउड सर्विस की क्रॉस-सेल करती है। ऐसे में कंपनी के मुनाफे और वैल्यूएशन के लिहाज से इसका लेंडिंग बिजनेस काफी अहम हो जाता है।
दिसंबर तिमाही के दौरान पेटीएम की कुल आमदनी में फाइनेंशियल सर्विसेज का योगदान 22 फीसदी रहा, जो पिछले साल इसी तिमाही में सिर्फ 9 फीसदी था। यह साफ तौर से बताता है कि Paytm का लेंडिंग बिजनेस (पर्सनल लोन, मर्चेंट लोन और पेटीएम पोस्टपेड) पिछले साल की तुलना में अच्छी तरह से बढ़ा है। दिसंबर तिमाही में Paytm ने करीब 9,958 करोड़ रुपये के लोन बांटे हैं। इसमें से 52 फीसदी लोन पेटीएम पोस्टपेड ग्राहकों को दिए जाने वाले 'BNPL (बाय नाउ पे लेटर) सुविधा के तहत है।
BNPL कंपनी के लिए एक तेजी से बढ़ता हुआ बिजनेस वर्टिकल है, लेकिन अभी इसे जोखिम के नजरिए से टेस्ट करना बाकी है। बढ़ती महंगाई और ब्याज दरें इस पर नकारात्मक असर डाल सकती है। साथ ही दूसरे NBFC के आने से भी इसमें कॉम्टीशन कड़ा होता जा रहा है।
नियामकीय खतरे
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने पिछले साल मार्च में पेटीएम पेमेंट बैंक को नए कस्टमर्स जोड़ने से रोक दिया था। यह पेटीएम के बैंकिंग लाइसेंस पाने की योजना को बड़ा झटका था। कंपनी ने अभी तक यह नहीं बताया कि ये बैन कब तक हटेगा। इस संबंध में कोई सकारात्मक खबर, इसके शेयरों पर सकारात्मक असर डाल सकती है।
इसके अलावा आने वाले समय में कई और नियामकीय बदलावों की भी चर्चा है। इसमें डिजिटल लेंडिंग बिजनेस को लेकर दिशानिर्देश, डिजिटल पेमेंट के विभिन्न चैनलों के लिए जाने वाले फीस को नियम आदि शामिल है जो पेटीएम के बिजनेस को प्रभावित कर सकते हैं। Paytm के रेवेन्यू का 61 फीसदी हिस्सा पेमेंट बिजनेस से ही आता है।
री-रेटिंग की अभी उम्मीद नहीं
पेटीएम का आईपीओ करीब 1,39,000 करोड़ के वैल्यूएशन पर आया था। इस वैल्यूएशन पर कंपनी के भविष्य में बैंकिंग लाइसेंस मिलने की संभावना जताई गई थी। हालांकि अब ऐसा लगता है कि बैंकिंग लाइसेंस पाना पेटीएम के लिए काफी मुश्किल रहने वाला है। साथ ही फाइनेंशियल सेवाओं के ऑनलाइन होने का लाभ उठाने के लिए सिर्फ पेटीएम ही इस फील्ड में इकलौती बड़ी कंपनी नहीं है।
दिसंबर तिमाही में पेटीएम ने बेहतर प्रदर्शन किया है और इसका मार्केट कैप भी गिरकर 40,000 करोड़ के नीचे आ गया है। फिर भी शेयर को मौजूदा कीमत पर खरीदने का कोई मतलब क्यों नहीं बनता?
पेटीएम अपनी लिस्टिंग के बाद से ही चर्चा में है। हाल ही में बायबैक की घोषणा बाजार के लिए अच्छी नहीं रही है और इसके पीछे की मंशा को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। निवेशकों का भरोसा फिर से हासिल करने के लिए कंपनी को कॉरपोरेट गवर्नेंस के उच्च मानकों का पालन करते हुए आमदनी में लगातार सुधार करना होगा।
कंपनी का वैल्यूएशन वित्त वर्ष 24 के अनुमानित रेवेन्यू के 3.5 गुना (13.4x से) के वाजिब स्तर पर आ गया है। लेकिन बढ़ती ब्याज दरों और फंडिंग की किल्लत ने दुनियाभर में टेक स्टार्टअप के लिए नकारात्मक माहौल को बढ़ा दिया है। घाटे में चल रही टेक कंपनियों को इसके सबसे अधिक चोट पहुंची है। साथ ही इसने निवेशकों को टेक कंपनियों के सही वैल्यूएशन को लेकर इस्तेमाल किए जाने वाले मेट्रिक्स के बारे में भी बताया है।
इसलिए पेटीएम का वैल्यूएशन जहां इस वक्त रेवेन्यू मल्टीपल्स, GMV मल्टीपल्स और यूजर बेस मल्टीपल्स के आधार पर आकर्षक लग सकता है। वहीं दूसरी तरफ बाजार के माहौल को ध्यान में रखते हुए वैल्यूएशन अब कैश फ्लो/मुनाफे के आधार पर 'रीसेट' हो गया है और पेटीएम के लिए कैश फ्लो और मुनाफा दोनों अभी भी कुछ समय दूर है। सीधे शब्दों में कहें तो लेकिन पेटीएम के शेयरों की कीमत ऑपरेटिंग प्रदर्शन में सुधार के बावजूद बहुत अधिक बढ़ने की उम्मीद नहीं है क्योंकि अब शेयर को देखने को तरीका बदल गया हैं
हिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।