जीरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर और CEO नितिन कामत ने अनलिस्टेड शेयर मार्केट के लिए बढ़ती दीवानगी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि हाल के दिनों में उन्होंने इस अनलिस्टेड मार्केट को लेकर कुछ बेहद ही मूर्खतापूर्ण कहानियां” सुन रहे हैं, जो निवेशकों की बढ़ते लालच और गलतफहमी को दिखाता हैं।
कामत ने लिखा, “बाहर जो हो रहा है, वो काफी पागलपन वाला है। लोग IPO से पहले अनलिस्टेड मार्केट से अंधाधुंध शेयर खरीद रहे हैं, ये सोचकर कि उन्हें IPO से पहले ज्यादा मुनाफा मिलेगा। लेकिन इस लालच में वे इससे जुड़ी कुछ कड़वी सच्चाई भूल जा रहे हैं।”
कामत का इशारा उन निवेशकों और ट्रेडर्स की ओर था, जो बिना सही जानकारी और अत्यधिक जोखिम के बावजूद अनलिस्टेड शेयरों में भारी निवेश कर रहे हैं।
कामत के मुताबिक, प्री-IPO कहे जाने वाले कई अनलिस्टेड शेयर पहले से ही 100–500% तक के मार्कअप, भारी कमीशन और “बेतुकी कीमतों” पर बेचे जा रहे हैं। सबसे बड़ा जोखिम यह है कि कंपनी का IPO आने पर उसका इश्यू प्राइस अनलिस्टेड मार्केट के रेट से काफी कम निकलता है, जिससे निवेशकों का लाभ तो दूर, सीधा नुकसान हो जाता है।
2025 में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां IPO की कीमतें अनलिस्टेड मार्केट के मुकाबले काफी कम रखी गईं, जिससे निवेशकों में बड़ी निराशा देखी गई। उदाहरण के लिए-
कामत ने आगे लिखा, "IPO शुरू होने से पहले ही आपके 'सभी लाभ' मिट जाते हैं। मुझे सच में कभी उम्मीद नहीं थी कि अनलिस्टेड शेयर मार्केट एक दिन इतना पॉपुलर हो जाएगा। मेरे कुछ साथियों ने मुझे एक ऐसा प्लेटफॉर्म भी दिखाया जो वॉट्सऐप पर धड़ाधड़ मैसेज भेजकर इन शेयरों को बेचने की कोशिश कर रहा है।"
IPO के बाद की हकीकत क्या?
NSDL का शेयर भले ही अपने प्री-IPO अनलिस्टेड प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रहा है, लेकिन यह अभी भी अपने जून वाले प्री-आईपीओ हाई से नीचे है। टाटा कैपिटल का शेयर भी अपने अनलिस्टेड मार्केट प्राइस से काफी नीचे है और IPO प्राइस के आसपास ही फंसा हुआ है। ये उदाहरण दिखाते हैं कि अनलिस्टेड मार्केट में जिस तरह के "कागजी मुनाफे" दिखाए जाते हैं, वे IPO आते ही गायब हो जाते हैं और नए निवेशक सबसे ज्यादा नुकसान झेलते हैं।
नितिन कामत ने लिखा, “लोग सिर्फ लालच में आकर फंस रहे हैं और मार्केट में इस तरह का पागलपन पहले कभी नहीं देखा।” नितिन कामत के पोस्ट को आप नीचे देख सकते हैं-
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