पिछले कुछ महीनों में उन शेयरों में काफी मुनाफावसूली दिखी है, जिनकी कीमतें काफी चढ़ गई थीं। इस बीच इनवेस्टर्स की दिलचस्पी ऐसे स्टॉक्स में बढ़ी है, जिनकी अगले बुलरन में बड़ी हिस्सेदारी हो सकती है। जोमैटो और स्विगी के स्टॉक्स इसके उदाहरण हैं। उधर, डिफेंस, रेलवे और कंस्ट्रक्शन कंपनियों के स्टॉक्स थके हुए दिख रहे हैं। पिछले 6 महीनों में जोमैटो का शेयर 60 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है। यह पहली न्यू-एज टेक कंपनी है, जो बीएसई सेंसेक्स का हिस्सा बना है। उधर, स्विगी के शेयरों में एक महीने में 25 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई है। ऐसा लगता है कि जो निवेशक जोमैटो के शेयरों में निवेश का मौका चूक गए थे, वे स्विगी के शेयरों में निवेश कर रहे हैं। 11 दिसंबर को स्विगी और जोमैटो के शेयरों में तेज गिरावट आई। सवाल है कि क्या यह इनमें निवेश का मौका है?
क्विक कॉमर्स कंपनियां अभी सफर के शुरुआती चरण में हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन कंपनियों की ग्रोथ शानदार रह सकती है। CLSA ने कहा है कि क्विक कॉमर्स सेगमेंट का आकार FY24 से FY27 के बीच छह गुना हो सकता है। उसने कहा है कि इस बढ़ते बाजार में कई कंपनियों के लिए संभावना दिख रही है। सवाल है कि इस सेगमेंट में आपको किस स्टॉक पर दांव लगाना चाहिए। आप चाहे जिस स्टॉक पर दांव लगाएं, आपको अच्छा मुनाफा हो सकता है।
स्विगी के शेयर 10 दिसंबर को 1 फीसदी चढ़कर 542 रुपये पर बंद हुए। CLSA ने स्विगी के शेयरों को कवर करना शुरू किया है। उसने Swiggy के शेयरों को खरीदने की सलाह दी है। इसके लिए 708 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। बुल्स का कहना है कि स्विगी की ग्रोथ के लिए अच्छी संभावनाएं दिख रही हैं। आगे मुनाफा कमाने की कंपनी की क्षमता भी बढ़ने की उम्मीद है। फूड डिलीवरी सेगमेंट में स्विगी दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। FY24 से FY27 के बीच क्विक कॉमर्स मार्केट का आकार बढ़कर छह गुना हो जाने की उम्मीद है। स्विगी को इस ग्रोथ का बड़ा फायदा मिलेगा।
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वारी एनर्जीज के शेयरों में 10 दिसंबर को 5.5 फीसदी का उछाल दिखा। यह कंपनी हाल में स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट हुई है। कंपनी ने एक बड़ा ऑर्डर हासिल किया है, जिसका असर इसके शेयरों पर देखने को मिला। रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों के लिए अच्छी संभावना दिख रही है। Waaree Energies पीवी मॉड्यूल बनाने वाली बड़ी कंपनियों में से एक है। इसकी उत्पादन क्षमता 12 GW की है। गुजरात और उत्तर प्रदेश में इसके 5 प्लांट्स हैं। उधर, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिकी सरकार का फोकस रिन्यूएबल एनर्जी पर घट सकता है। इसका असर पीवी मॉड्यूल एक्सपोर्ट करने वाली इंडियन कंपनियों पर पड़ सकता है।
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