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संयुक्त संपत्ति होने पर पति-पत्नी कैसे कर सकते हैं बड़ी टैक्स बचत, जानिए जरूरी बातें

पति-पत्नी के नाम संयुक्त रूप से संपत्ति लेने से न केवल वित्तीय सुरक्षा मिलती है, बल्कि टैक्स में भी महत्वपूर्ण बचत होती है। सही दस्तावेज और साझेदारी स्पष्ट होने पर दोनों को होम लोन, टैक्स कटौती और कानूनी सुरक्षा के कई फायदे मिलते हैं। आइए जानते हैं ऐसे आसान और असरदार तरीके, जिनसे आप अपने टैक्स बोझ को कम कर सकते हैं।

Edited By: Shradha Tulsyan
अपडेटेड Nov 12, 2025 पर 15:48
संयुक्त संपत्ति होने पर पति-पत्नी कैसे कर सकते हैं बड़ी टैक्स बचत, जानिए जरूरी बातें

टैक्स निर्धारण कैसे प्रभावित होता है
संपत्ति से होने वाली आय और पूंजीगत लाभ पर दोनों को अपने हिस्से के अनुसार अलग-अलग टैक्स देना होता है। बिना हिस्सेदारी तय किए अधिकारियों द्वारा बराबर का मान लिया जाता है, जिससे टैक्स अधिक लग सकता है।

क्लबिंग नियम से बचाव के उपाय
यदि संपत्ति पति के नाम होकर पत्नी ने योगदान न किया हो, तो उस आय को पति की आय में जोड़ा जाता है। इसलिए खरीद के समय दोनों का वित्तीय योगदान जरूरी है, ताकि क्लबिंग नियम लागू न हों।

संयुक्त होम लोन के दोहरे फायदे
जब पति-पत्नी सह-ऋणकर्ता होते हैं, तो वे होम लोन पर प्रिंसिपल और ब्याज दोनों पर अलग-अलग टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं। इससे अधिक टैक्स बचत संभव होती है।

किराए की आय पर टैक्स निर्धारण
किराए की आय भी दोनों के स्वामित्व के अनुपात में बंटी होती है। दोनों अपने अपने हिस्से की आय पर 30% मानक कटौती के बाद टैक्स चुकाते हैं, जिससे टैक्स बोझ कम होता है।

पूंजीगत लाभ और बिक्री पर छूट
संपत्ति बिक्री पर कैपिटल गेन टैक्स दोनों मालिकों के हिस्से के अनुसार लगता है। वे सेक्शन 54, 54EC और 54F के तहत भी अलग-अलग टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं।

TDS नियमों की समझ
अगर संपत्ति का मूल्य 50 लाख रुपये से अधिक है तो प्रत्येक सह-मालिक की हिस्सेदारी के अनुसार 1% TDS देना होता है। कुल मूल्य पर TDS नहीं लगता, जिससे टैक्स भुगतान में सटीकता आती है।

टैक्स बचाने के स्मार्ट उपाय
संपत्ति का स्वामित्व साफ-साफ दस्तावेज में दर्ज करें। होम लोन सह-ऋणकर्ता बनें, अलग-अलग बैंक खातों से समान भुगतान करें और हमेशा टैक्स विशेषज्ञ की सलाह लें। इससे टैक्स बचत के साथ कानूनी सुरक्षा भी मिलती है।

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