BS-6 2nd Stage: कार खरीदने का कर रहे हैं प्लान तो न करें देरी, जल्द ही बढ़ने वाली है कीमत, जानिए क्यों

BS-6 2nd Stage: गाड़ियों की कीमत में आने वाले दिनों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसकी वजह ये है कि अगले साल अप्रैल से देश में सख्त उत्सर्जन मानक (stricter emission norms) लागू हो रहे हैं

अपडेटेड Oct 10, 2022 पर 5:27 PM
नए वित्त वर्ष से देश में BS-6 का दूसरा चरण लागू किये जाने की योजना है।

BS-6 2nd Stage: अगर आप कार खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो जल्द ही फैसला लेना बेहतर होगा। इसकी वजह ये है कि अगले वित्त वर्ष से कार की कीमतों का बढ़ना लगभग तय है। लिहाजा इस फेस्टिव सीजन में ही कार खरीदना फायदे का सौदा साबित हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए वित्त वर्ष से देश में बीएस-6 का दूसरा चरण लागू किये जाने की तैयारी है। इसके लिए कार बनाने वाली कंपनियों को गाड़ी में कुछ मॉडिफिकेशन्स करने पड़ सकते हैं। जिससे कार की कीमतों पर असर पड़ेगा। इसीलिए माना जा रहा है कि भारत में अप्रैल (नए वित्त वर्ष) से कारों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

जानिए क्या है BS-6 का दूसरा चरण

इंडियन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री (Indian automobile industry) फिलहाल अपनी गाड़ियों को भारत स्टेज-6 (BS-6) इमिशन स्टैंडर्ड के दूसरे फेज के हिसाब से ढालने की कोशिश में जुटा हुआ है। ऐसा होने पर इमिशन स्टैंडर्ड यूरो-6 स्टैंडर्ड जैसे हो जाएंगे। कारें और कमर्शियल गाड़ियों को अपग्रेडेड स्टैंडर्ड्स के जैसे बनाने के लिए उनमें एडवांस्ड डिवाइस लगाना पड़ेगा। कंपनियों को गाड़ियों को अपग्रेड करने के लिए कई तरह के उपकरण लगाना पड़ सकता है। लिहाजा ऑटोमोबाइल सेक्टर के जानकारों का मानना है कि इससे व्हीकल मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इस स्थिति में कंपनियां लागत में हुई बढ़ोतरी की वसूली करने के लिए ग्राहकों पर बोझ डाल सकती हैं।

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गाड़ियों में किस तरह के होंगे मोडिफिकेशन?

उत्सर्जन मानकों पर खरा उतरने के लिए वाहन बनाने वाली कंपनियों को अपनी गाड़ियों को ऐसे डिवाइस से लैस करना होगा, जो चलती गाड़ी के इमिशन लेवल की निगरानी कर सके। मतलब ये डिवाइस कैटेलिक कन्वर्टर और ऑक्सीजन सेंसर जैसे पार्ट्स पर नजर रखेगा। जैसे ही गाड़ी का इमिशन लेवल तय मानक से ज्यादा होगा। यह डिवाइस तुरंत संकेत देगा कि गाड़ी की सर्विस का समय आ चुका है।

इतना ही नहीं वाहन में खर्च होने वाले ईंधन (Fuel) के लेवल पर काबू रखने के लिए वाहनों में एक प्रोग्राम्ड फ्यूल इंजेक्टर भी लगाया जाएगा। यह उपकरण इंजन में भेजे जाने वाले फ्यूल (पेट्रोल और डीजल) की मात्रा और उसकी टाइमिंग पर भी नजर रखेगा।

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