Maruti Suzuki India Ltd : भारत में हर दूसरी कार बेचने वाली मारुति सुजुकी इंडिया लि. का मानना है कि कार्बन उत्सर्जन में गिरावट का समाधान सिर्फ इलेक्ट्रिक व्हीकल नहीं हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित करने वाले तीसरे बड़े देश के लिए फिलहाल तो यही हकीकत है।
मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर सी भार्गव ने ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि इलेक्ट्रिक कारों की तुलना में हाइब्रिड टेक्नोलॉजी, नैचुरल गैस और बायोफ्यूल से चलने वाली गाड़ियां एक स्वच्छ भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती हैं। इसकी वजह यह है कि देश में 75 फीसदी बिजली कोयले से बनती है।
सभी तकनीक का इस्तेमाल करना है जरूरी
भार्गव ने कहा, देश में बनने वाली बिजली पर गौर किए बिना इलेक्ट्रिक कारों की बात करना इस समस्या के प्रति छोटी सोच है। उन्होंने कहा, “जब तक हमारे पास स्वच्छ ग्रिड पावर नहीं हो, तब तक किसी एक प्रौद्योगिकी पर जोर दिए बिना सीएनजी, एथेनॉल, हाइब्रिड और बायोगैस जैसी सभी उपलब्ध प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करना जरूरी है। इससे कार्बन फुटप्रिंट में कमी लाने में मदद मिलेगी।”
मुश्किल में पड़ सकती हैं कई बड़ी कंपनियां
भार्गव के इन विचारों ने दुनिया की दूसरे नंबर की कंपनी फॉक्सवैगन एजी (Volkswagen AG) सहित कई बड़ी कार कंपनियों को एक हद तक मुश्किल में डाल दिया है। फॉक्सवैगन एजी 2024 तक टेस्ला इंक को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी बन सकती है।
दुनिया भर में सबसे ज्यादा कार बेचने वाली टोयोटा मोटर कॉर्प (Toyota Motor Corp) इलेक्ट्रिक कार बनाने पर खासा पैसा रही है, लेकिन उसका मानना है कि हाइब्रिड टेक्नोलॉजी ज्यादा तार्किक अंतरिम कदम है। वहीं इंडस्ट्री एक स्थायी बैटरी सप्लाई चेन बनाने में लगी हुई है।
पीएम मोदी ने किया है यह ऐलान
चीन और अमेरिका की तुलना में भारत की इलेक्ट्रक कारों की ओर शिफ्ट होने की गति धीमी है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2070 तक भारत को नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन करने वाला देश बनाने की प्रतिबद्धता जाहिर की है।
आर्थर डी. लिटिल का अनुमान है कि 2030 तक कुल ईवी की बिक्री में इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों की हिस्सेदारी सिर्फ 5 फीसदी के आसपास होगा। दोपहिया और तीन पहिया वाहनों के क्षेत्र में ज्यादा प्रगति से बैटरी चालित गाड़ियों हिस्सेदारी बढ़कर एक तिहाई हो जाएगी।
12 महीने के भीतर पहली हाइब्रिड कार पेश करेगी मारुति
भार्गव ने कहा, मारुति की अपनी पैरेंट कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्प और टोयोटा के साथ भागीदारी में 12 महीने के भीतर अपनी पहली हाइब्रिड कार पेश करने की योजना है। उन्होंने कहा, भारत के चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी को देखते हुए हाइब्रिड कारें ज्यादा बेहतर विकल्प हैं।
इसके अलावा, मारुति सुजुकी सीएनजी चालित कारों पर ज्यादा जोर देगी, क्योंकि यह पेट्रोल और डीजल की तुलना में ज्यादा स्वच्छ है और इसकी कारें ईवी से सस्ती होंगी।