अगर आपके पास कोई वाहन है तो आपने देखा होगा कि एक वक्त के बाद उसके टायर खराब हो जाते हैं। ऐसे लाखों वाहन हैं, जिनके टायर हर साल खराब होते हैं। इनके खराब होने पर हम बदलवा देते हैं। इसके बाद हम पुराने टायरों की तरफ नहीं देखते हैं। कभी-कभी तो पुराने टायर को गैराज में ही छोड़कर चले जाते हैं। लेकिन कभी आपके मन में आता होगा कि पुराने टायरों का क्या होता है? आपको जानकर हैरानी होगी कि देश की बहुत सारी कंपनियां इन खराब टायरों से साल में करोड़ों रुपये कमा लेती है। कुछ टायरों को रिसाइकलिंग के लिए भेजा जाता है। वहीं कुछ टायरों के जरिए सीमेंट भी बनाई जाती है।
लाखों टायर होते हैं बेकार
एक मीडिया रिपोर्ट में NGT के डेटा के आधार पर कहा गया है कि हर साल करीब 2.75 लाख टायर बेकार हो जाते हैं। इनमें से बहुत कम टायरों की रिसाइकलिंग की जाती है। इससे निपटने के लिए बहुत कम कंपनियां आगे आती है। करीब 30 लाख टायरों की रिसाइक्लिंग होती है। बेकार टायरों को रिसाइकल कर कई कंपनियां करोड़ों रुपए कमा रही हैं। इसे गला कर दोबारा से क्रम्ब रबर, पायरोलिसिस तेल और अन्य कई सामान बनाए जाते हैं। साल 2019 में NGT ने एक रिपोर्ट में कहा था कि पायरोलिसिस उद्योग को बंद कर देना चाहिए। इसकी वजह ये है कि इससे पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। इन टायरों की गुणवत्ता भी बेहद कमजोर है। ऐसे में टायरों की कीमत अलग-अलग है।
डोमिनिकन गणराज्य में बेकार टायरों से सीमेंट बनाई जाती है। टायर्स को गलने में हजारों साल लग जाते हैं। लिहाजा ये कंपनियां इन्हे भट्टी में इस्तेमाल करती है। आमतौर पर भट्टी में लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल होता है। लेकिन इसके मुकाबले टायर्स का इस्तेमाल करने से ईंधन की कम खपत होती है। इससे पर्यावरण को ज्यादा नुकसान नहीं होता है।