गूगल पर डिजिटल विज्ञापन में एकाधिकार के आरोप साबित, अब टूट सकता है विज्ञापन बिजनेस

अमेरिका में कोर्ट ने गूगल को डिजिटल विज्ञापन बाजार में एकाधिकार के लिए दोषी ठहराया है। कंपनी ने पब्लिशर्स को अपने दो टूल्स एक साथ इस्तेमाल करने पर मजबूर किया। इससे इंटरनेट पर विज्ञापन की दुनिया में बड़ा बदलाव आ सकता है।

अपडेटेड Apr 17, 2025 पर 10:45 PM
कोर्ट ने माना कि गूगल ने पब्लिशर्स को मजबूर किया कि अगर वे Google Ad Manager इस्तेमाल करें, तो उन्हें Google AdX भी लेना ही होगा।

गूगल को अमेरिका में बड़ा कानूनी झटका लगा है। वहां की एक संघीय अदालत ने गुरुवार (17 अप्रैल) को फैसला सुनाते हुए कहा कि गूगल ने ऑनलाइन विज्ञापन कारोबार में अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल किया है। कोर्ट ने इसे प्रतिस्पर्धा-विरोधी (Anti-trust) कानूनों का उल्लंघन माना है।

ये मामला अमेरिकी सरकार और आठ राज्यों द्वारा 2023 में दायर एक मुकदमे से जुड़ा है। इसमें आरोप था कि गूगल ने डिजिटल ऐड टेक्नोलॉजी में अपना एकाधिकार बनाने के लिए ऐसी नीतियां अपनाईं, जिससे बाकी कंपनियां प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गईं।

गूगल के कौन-कौन से टूल्स पर सवाल उठा?


गूगल दो बड़े डिजिटल टूल्स का मालिक है, जिनका विज्ञापन जगत में दबदबा है।

  1. Google Ad Manager (DFP): जो वेबसाइटों को उनके पेज पर विज्ञापन दिखाने में मदद करता है।
  2. AdX (Ad Exchange): एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जहां विज्ञापनदाता बोली लगाकर विज्ञापन स्पेस खरीदते हैं।

कोर्ट ने माना कि गूगल ने पब्लिशर्स को मजबूर किया कि अगर वे Google Ad Manager इस्तेमाल करें, तो उन्हें Google AdX भी लेना ही होगा। इससे गूगल को विज्ञापन की बोली और डिस्प्ले दोनों पर कंट्रोल मिल गया। इससे बाकी कंपनियां मार्केट से बाहर हो गईं।

गूगल ने फैसले पर क्या कहा?

गूगल ने इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। कंपनी की वाइस प्रेसिडेंट ली-ऐन मुलहोलैंड ने कहा, “हमने इस केस का आधा हिस्सा जीत लिया है और बाकी हिस्से को चुनौती देंगे। कोर्ट ने माना कि हमारे विज्ञापनदाता टूल्स और कुछ अधिग्रहण (जैसे DoubleClick) प्रतिस्पर्धा के लिए नुकसानदेह नहीं हैं। लेकिन हम इस बात से असहमत हैं कि हमारे पब्लिशर टूल्स गलत हैं।”

अब गूगल के बिजनेस के साथ क्या हो सकता है?

अदालत ने अभी तय नहीं किया है कि गूगल के एकाधिकार के मामले में क्या करना है। लेकिन, मौजूदा फैसले के बाद अब दो चीजें हो सकती हैं:

  • गूगल से कहा जा सकता है कि वह अपने कुछ बिजनेस हिस्से अलग करे, यानी Google Ad
  • Manager या AdX जैसे टूल्स को बेचे, ताकि बाजार में बराबरी की स्थिति बने।

या फिर गूगल को उसके टूल्स के साथ काम करने की इजाजत दी जा सकती है, लेकिन कुछ कड़े नियमों के तहत। जैसे कि वह अपने टूल्स को बाकी प्रतियोगियों से बेहतर ट्रीटमेंट नहीं दे पाएगा।

क्या इससे इंटरनेट पर फर्क पड़ेगा?

अगर कोर्ट ने गूगल के ऐड बिजनेस को तोड़ा या उस पर नियंत्रण लगाया, तो इससे विज्ञापनदाताओं को ज्यादा विकल्प और पारदर्शिता मिल सकती है। वेबसाइट मालिक (पब्लिशर) बेहतर दाम पर विज्ञापन बेच पाएंगे। इससे गूगल के दबदबे को भी थोड़ी चुनौती मिलेगी।

ये गूगल का ऐसा इकलौता केस नहीं है। इससे पहले एक और मामले में गूगल को सर्च मार्केट में एकाधिकार रखने का दोषी पाया गया था। उस केस में आखिरी फैसले का ऐलान 2025 के मध्य तक होने की उम्मीद है।

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