बांग्लादेश हाई कोर्ट ने 21 अगस्त को पूर्व प्रधान मंत्री शेख हसीना पर ग्रेनेड हमले के मामले में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसमें कुल 49 लोगों को दोषी ठहराया गया था। इनमें पूर्व राज्य मंत्री लुतफुज्जमां बाबर समेत 19 लोगों को निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई और सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
हाई कोर्ट ने कहा कि मामलों में ट्रायल कोर्ट का फैसला अवैध है, क्योंकि यह अवैध तरीके से दिया गया था। ढाका ग्रेनेड हमला इस साल 21 अगस्त को बंगबंधु एवेन्यू पर अवामी लीग की ओर से आयोजित आतंकवाद विरोधी रैली में हुआ था।
हमले में 24 लोगों की गई जान
हमले में 24 लोगों की मौत हो गई और 500 से ज्यादा घायल हो गए। हमला शाम 5:22 बजे तब किया गया, जब तत्कालीन विपक्ष की नेता शेख हसीना ने एक ट्रक के पीछे से 20,000 लोगों की भीड़ को संबोधित किया था। हमले में हसीना को कुछ चोटें भी आईं।
इस बीच, 30 नवंबर को इस्कॉन कोलकाता ने दावा किया कि बांग्लादेश के अधिकारियों ने उसके दो भिक्षुओं, आदिपुरुष श्याम दास और रंगनाथ दास ब्रह्मचारी और उसके सचिव चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार कर लिया है।
ISKCON कोलकाता के उपाध्यक्ष राधा रमन ने कहा कि भिक्षुओं को पुलिस ने शुक्रवार को उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वे 25 नवंबर को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किए गए चिन्मय कृष्ण दास के सचिव से मिलने के बाद घर जा रहे थे।
ISKCON सेंटर में भी तोड़फोड़ की
इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधा रमन ने कहा, "29 नवंबर को जब आदिपुरुष श्याम दास और रंगनाथ दास ब्रह्मचारी चिन्मय कृष्ण प्रभु से मिलकर लौट रहे थे, तो उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हमें यह भी जानकारी मिल रही है कि चिन्मय कृष्ण दास के सचिव गिरफ्तार भी कर लिया गया है।"
उन्होंने आगे दावा किया कि दंगाइयों ने बांग्लादेश में इस्कॉन सेंटर में भी तोड़फोड़ की थी।
भारत ने शुक्रवार को बांग्लादेश में "चरमपंथी बयानबाजी, हिंसा और उकसावे की बढ़ती घटनाओं" पर चिंता जताई। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि भारत ने बांग्लादेश सरकार के साथ हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर लक्षित हमलों का मुद्दा लगातार और दृढ़ता से उठाया है।