Bangladesh: न अधिकारियों की मानी, न बहन की सुनी, अखिरी समय तक भी सत्ता छोड़ने के तैयार नहीं थीं शेख हसीना, 45 मिनट का मिला था समय

Bangladesh Violence News: अब पता चला है कि शेख हसीना आखिरी समय तक भी सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं थीं। ये सामने आया कि देश छोड़ने से पहले शेख हसीना ने IGP की ओर इशारा करते हुए कहा, पुलिस अच्छा काम कर रही है, तब IGP ने कहा, स्थिति अब इतनी गंभीर हो गई है कि पुलिस भी अब इतना सख्त रुख नहीं अपना सकेगी

अपडेटेड Aug 06, 2024 पर 2:49 PM
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Bangladesh: न अधिकारियों की मानी, न बहन की सुनी, अखिरी समय तक भी सत्ता छोड़ने के तैयार नहीं थीं शेख हसीना

शेख हसीना बांग्लादेश और प्रधानमंत्री की कुर्सी दोनों ही छोड़ चुकी हैं और फिलहाल भारत में हैं। हालांकि, ये किसी को मालूम नहीं कि वह यहां से कब और कहां जाएंगी, क्योंकि खबर ऐसी है कि ब्रिटेन ने उन्हें राजनीतिक शरण देने से इनकार कर दिया है। उनके बांग्लादेश छोड़ने के बाद से कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। अब पता चला है कि शेख हसीना आखिरी समय तक भी सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं थीं। ये सामने आया कि देश छोड़ने से पहले शेख हसीना ने IGP की ओर इशारा करते हुए कहा, पुलिस अच्छा काम कर रही है, तब IGP ने कहा, स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि पुलिस भी अब इतना सख्त रुख नहीं अपना सकेगी।

बांग्लादेश (Bangladesh Violence) की न्यूज वेबसाइट prothomalo ने बताया, शीर्ष अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि अब हालात को बलपूर्वक काबू करना संभव नहीं होगा, लेकिन शेख हसीना यह मानने को तैयार नहीं थीं।

बहन को अलग कमरे में ले गए अधिकारी


इसके बाद अधिकारियों ने एक अलग कमरे में उनकी बहन शेख रेहाना से बात की। उन्होंने उन्हें स्थिति समझाई और शेख हसीना को समझाने के लिए कहा। इसके बाद शेख रेहाना ने शेख हसीना से बात की, लेकिन वह सत्ता पर काबिज रहने पर अड़ी रहीं।

इसके बाद शीर्ष अधिकारियों में से एक ने हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय को बुलाया, जो विदेश में थे। इसके बाद जॉय ने अपनी मां से फोन पर बात की। तब कहीं जाकर शेख हसीना इस्तीफा देने को तैयार हो गईं। हालांकि, वह राष्ट्र को संबोधित एक भाषण रिकॉर्ड करना चाहती थीं।

45 मिनट का मिला समय

तब तक इंटेलिजेंस रिपोर्ट आ चुकी थी कि शाहबाग और उत्तरा से भारी संख्या में छात्रों ने मार्च शुरू कर दिया है। दूरी को देखते हुए अनुमान लगाया गया कि प्रदर्शनकारियों को शाहबाग से गणभवन तक पहुंचने में 45 मिनट लगेंगे।

ऐसे में हसीना का भाषण रिकॉर्ड करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था। इसे ध्यान में रखते हुए, शेख हसीना को कोई भाषण रिकॉर्ड करने के लिए नहीं, बल्कि 45 मिनट के भीतर वहां निकलने लिए तैयार होने का समय दिया गया।

शेख हसीना ने कैसे छोड़ा देश?

इसके बाद शेख हसीना (Sheikh Hasina) और उनकी बहन शेख रेहाना तेजगांव के पुराने एयर पोर्ट के हेलीपैड पर आईं। उनका कुछ सामान लादा गया और वे फिर बंगभवन चले गए।

शेख हसीना ने वहां अपने इस्तीफे की औपचारिकताएं पूरी कीं और करीब ढाई बजे शेख हसीना और उनकी छोटी बहन सैन्य हेलीकॉप्टर से भारत के लिए रवाना हो गईं।

फिलहाल भारत में ही हैं शेख हसीना

बांग्लादेशी न्यूज वेबसाइट ने कहा, "इंडियन एयर स्पेस में एंट्री करने के बाद, हेलीकॉप्टर कुछ देर तक आसमान में ही चक्कर लगाता रहा और बाद में अगरतला में BSF हेलीपैड पर उतरा।"

सोमवार शाम 5:36 बजे शेख हसीना गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के हिंडन एयरबेस पर उतरीं। वहां उनका स्वागत एक भारतीय सेना अधिकारी ने किया। फिलहाल वे भारत में ही मौजूद हैं।

अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने इस साल 11 जनवरी को लगातार चौथी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। 1996 में सातवें राष्ट्रीय संसद चुनाव के जरिए वह प्रधान मंत्री बनीं।

शेख हसीना और बांग्लादेश में चुनाव

जब 2001 में BNP ने चुनाव जीता, तो अवामी लीग विपक्ष में बैठी और शेख हसीना संसद में विपक्ष की नेता थीं। फिर 2008 में कार्यवाहक सरकार के तहत हुए चुनाव में जीतकर शेख हसीना फिर से प्रधानमंत्री बनीं।

पांच साल बाद 2014 में उन्होंने एकतरफा चुनाव कराया, जिसमें 153 उम्मीदवार निर्विरोध सांसद बन गए। विपक्ष ने उस चुनाव (10वीं संसद के लिए) में हिस्सा ही नहीं लिया। शेख हसीना और उनके गठबंधन सहयोगियों ने सरकार बनाई।

विवादित चुनाव

सबसे विवाद में 2018 के चुनाव रहे, जब हसीना एक बार फिर प्रधान मंत्री बनीं। ऐसे आरोप लगाए गए कि वोटिंग से एक रात पहले ही वोट डाल वाए जाने लगें, इसलिए इसे "रात का चुनाव" करार दिया गया।

विपक्ष ने इस साल जनवरी के 12वें संसदीय चुनाव में भी हिस्सा नहीं लिया। अपनी पार्टी के नेताओं को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़ा करके, एक "डमी" लड़ाई के जरिए वह फिर से प्रधान मंत्री बन गईं। विपक्ष ने इस चुनाव को ''डमी चुनाव'' करार दिया।

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