बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) इस हफ्ते इंटरेस्ट बढ़ा सकता है। उम्मीद है कि इंटरेस्ट रेट में यह यह वृद्धि पिछले 27 सालों में सबसे ज्यादा होगी। साथ ही इंग्लैंड का केंद्रीय बैंक 1.1 लाख करोड़ डॉलर के राहत पैकेज में से कुछ वापस लेने का प्लान भी पेश करेगा। बैंक ऑफ इंग्लैंड गुरुवार (4 अगस्त) को इंटरेस्ट बढ़ाने का फैसला लेगा।
बैंक ऑफ इंग्लैंड के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के साथ ही सख्त मौद्रिक नीति का दौर शुरू हो जाएगा। ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक के सामने तेजी से बढ़ता इनफ्लेशन बहुत बड़ा चैलेंज है। इंग्लैंड में इनफ्लेशन 40 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
इंग्लैंड में इनफ्लेशन और बढ़ने की आशंका जताई गई है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्र्यू बेली ने कहा है कि इस साल इंग्लैंड में इनफ्लेशन 11 फीसदी पर पहुंच सकता है। यह केंद्रीय बैंक के 2 फीसदी टारगेट से बहुत ज्यादा होगा।
बैंक ऑफ इंग्लैंड का यह भी मानना है कि इंटरेस्ट रेट बढ़ाने में वह दुनिया के दूसरे केंद्रीय बैंकों, खासकर अमेरिका के फेडरल रिजर्व के मुकाबले देर कर दी है। फेडरल रिजर्व ने पिछली दो मीटिंग्स में इंटरेस्ट रेट 1.5 फीसदी बढ़ा चुका है। इंग्लैंड के केंद्रीय बैंक के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने से पाउंड की वैल्यू पर भी असर पड़ेगा। इस साल डॉलर के मुकाबले पाउंड 10 फीसदी गिर चुका है।
लंदन में एचएसबीसी बैंक के सीनियर इकोनॉमिस्ट लिज मार्टिंस ने कहा, "इनफ्लेशन की स्थिति बहुत खराब है। गवर्नेर के संकेतों से ऐसा लगता है कि 50 बेसिस प्वॉइंट्स की वृद्धि हो सकती है। ऐसा लगता है कि केंद्रीय बैंक का रुख सख्त होगा।"
इनवेस्टर्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक के इंटरेस्ट रेट 0.50 फीसदी बढ़ाने के 70 फीसदी चांसेज है। इससे बेंचमार्क रेट बढ़कर 1.75 फीसदी हो जाएगा। यह 2009 के फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद से सबसे ज्यादा है।
ज्यादातर इकोनॉमिस्ट्स को इंटरेस्ट रेट आधा फीसदी बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन मॉर्गन स्टेनली और नैटेवेस्ट मार्केट्स का कहना है कि इंटरेस्ट रेट एक चौथाई फीसदी बढ़ाया जा सकता है। इसकी वजह यह है कि इंटरेस्ट रेट ज्यादा बढ़ाने से मंदी का जोखिम बढ़ जाएगा।