ईरान का अजेय किला 'ग्रेटर टुनब' तबाह! अमेरिका ने 90 मिनट तक बरसाए बम, थम सकती है दुनिया भर की तेल सप्लाई

US Strikes Greater Tunb Island: अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह हमला पूरे 90 मिनट तक चला, जिसमें ईरान के तटीय रक्षा तंत्र और क्रूज मिसाइल ठिकानों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया गया। इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को एक बार फिर पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है

अपडेटेड Jul 16, 2026 पर 10:57 AM
ग्रेटर टुनब उन 7 द्वीपों की श्रृंखला का हिस्सा है जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के चारों ओर ईरान का एक 'सुरक्षा कवच' बनाते हैं

US Strikes Greater Tunb Island: अमेरिका और ईरान के बीच भड़का महायुद्ध अब और भी ज्यादा आक्रामक हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरान की समुद्री नाकेबंदी लागू करने के बाद, अमेरिकी सेना ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण मिलिट्री बेस यानी 'ग्रेटर टुनब द्वीप' पर भीषण हवाई हमला किया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह हमला पूरे 90 मिनट तक चला, जिसमें ईरान के तटीय रक्षा तंत्र और क्रूज मिसाइल ठिकानों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया गया। इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को एक बार फिर पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर ग्रेटर तुनब द्वीप क्या है और अमेरिका ने इसे ही निशाना क्यों बनाया।

ईरान का 'अजेय किला' क्यों कहा जाता है ग्रेटर टुनब?


ग्रेटर टुनब भले ही आकार में एक छोटा सा द्वीप है, लेकिन मिडिल ईस्ट के समुद्री रास्ते पर नियंत्रण रखने के लिए इसका रणनीतिक महत्व सबसे ज्यादा है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रेटर टुनब उन 7 द्वीपों की श्रृंखला का हिस्सा है जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के चारों ओर ईरान का एक 'सुरक्षा कवच' बनाते हैं।

ईरानी अधिकारी इन द्वीपों को अपना 'ठहरा हुआ और न डूबने वाला विमानवाहक पोत' कहते हैं। इसका मतलब है कि इन्हें किसी युद्धपोत की तरह डुबाया या पीछे हटने पर मजबूर नहीं किया जा सकता।

आखिर क्यों ये द्वीप हैं इतने खतरनाक?

फारस की खाड़ी का एक बड़ा हिस्सा काफी उथला है, जिसके कारण दुनिया के बड़े तेल टैंकर और भारी युद्धपोत हर जगह से नहीं गुजर सकते। गहरे पानी वाले सीमित समुद्री रास्तों से गुजरने के कारण सभी बड़े जहाजों को ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा द्वीपों के बेहद करीब से गुजरना पड़ता है।

इन द्वीपों पर मौजूद रहकर ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) यहां से अपने लड़ाकू ड्रोन, फास्ट-अटैक बोट्स और समुद्री बारूदी माइंस बिछाने वाले जहाजों को आसानी से ऑपरेट करती है।

ईरान का वो सुरक्षा कवच, जिसे अमेरिका ने तोड़ा

रिसर्च के मुताबिक, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखने के लिए 7 द्वीपों की एक काल्पनिक घुमावदार श्रृंखला तैयार की है। इन द्वीपों के नाम इस प्रकार हैं:

  1. होर्मुज (Hormuz)
  2. लारक (Larak)
  3. केश्म (Qeshm)
  4. हेंगाम (Hengam)
  5. अबू मूसा (Abu Musa)
  6. ग्रेटर तुनब (Greater Tunb)
  7. लेसर तुनब (Lesser Tunb)

ये द्वीप ईरान की मुख्य भूमि से दूर फारस की खाड़ी के भीतर तक फैले हैं, जिससे ईरान को पूरे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक रूट पर नजर रखने और उसे कंट्रोल करने की ताकत मिलती है।

ईरान और UAE के बीच पुराना विवाद

ग्रेटर टुनब द्वीप पर प्रशासनिक नियंत्रण वर्तमान में ईरान का है, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी इस पर अपना दावा ठोकता है। साल 1971 में जब ब्रिटिश सेना इस क्षेत्र से हटी और यूएई आजाद हुआ, उसी समय ईरान ने ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा द्वीपों पर अपना नियंत्रण कर लिया था।

यूएई इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र (UN) में उठा चुका है और उसने इस विवाद को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में ले जाने की चेतावनी भी दी है, जबकि ईरान इसे अपना ऐतिहासिक हिस्सा मानता है।

ईरान के अन्य ठिकानों पर भी हुई बमबारी

ग्रेटर टुनब के अलावा अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के एक और बड़े सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिका ने सीस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित ईरानी सेना की 388वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड के बैरक पर भी बमबारी की है। यह ब्रिगेड ईरान के बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को संचालित करने के लिए जिम्मेदार है।

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