चीन की राह पर चला ब्रिटेन? नए साल से UK भी जारी नहीं करेगा कोरोना का डेटा, कहा- हमने Covid-19 के साथ रहना सीख लिया
ब्रिटेन (Britain) के अधिकारियों ने इस फैसले के पीछे का कारण भी बताया। उन्होंने कहा, "देश वैक्सीन और दवाओं की मदद से Covid-19 वायरस के साथ जीना सीख गया है, तो ऐसे में संक्रमण के आंकड़े जारी करना जरूरी नहीं समझा जाता
Coronavirus: नए साल से ब्रिटेन भी जारी नहीं करेगा कोरोना का डेटा
ब्रिटेन (Britain) भी अब चीन (China) की राह पर चल पड़ा है। यूके (UK) के स्वास्थ्य अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि नए साल से अब रेगुलर Covid-19 इंफेक्शन मॉडलिंग डेटा जारी नहीं किया जाएगा। इसका मतलब ये हुआ कि ब्रिटेन अब कोरोना के हर रोज आने वाले नए केस के नंबर जारी नहीं करेगा। ब्रिटेन के अधिकारियों ने इस फैसले के पीछे का कारण भी बताया। उन्होंने कहा, "देश वैक्सीन और दवाओं की मदद से वायरस के साथ जीना सीख गया है, तो ऐसे में संक्रमण के आंकड़े जारी करना जरूरी नहीं समझा जाता।"
यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (UKHSA) ने कहा कि वे दूसरे कॉमन वायरल और मौसमी फ्ली की तरह ही Covid-19 को मॉनिटर करते रहेंगे।
इस साल अप्रैल के बाद से, रिप्रोडक्टिव रेट या R Value, का डेटा हर 15 दिन बाद जारी किया जा रहा था। R Value वो रेट है, जिस स्पीड से कोरोना वायरस लोगों को अपनी चपेट लेता है या संक्रमित करता है।
UKHSA एपिडेमियोलॉजी मॉडलिंग रिव्यू ग्रुप (EMRG) के अध्यक्ष डॉ. निक वाटकिंस ने कहा, "महामारी के दौरान, R Value और ग्रोथ रेट ने पब्लिक हेल्थ एक्शन और सरकार के फैसलों को लोगों तक पहुंचाने में एक आसान और कारगर इंडिकेटर के तौर पर काम किया है।"
उन्होंने कहा, "अब जबकि वैक्सीन और ट्रीटमेंट के चलते, हम एक ऐसे फेज में आ पहुंचे हैं, जहां हम COVID-19 के साथ रहना सीख गए हैं, तो ऐसे में निगरानी कम हो गई है। हालांकि, फिर भी कई अलग-अलग इंडिकेटर्स के जरिए बारीकी से निगरानी की जा रही है, लेकिन अब इस खास डेटा को पब्लिश करने की जरूरत नहीं है।"
डॉ. निक ने आगे कहा, "हम COVID-19 गतिविधि की उसी तरह निगरानी करते रहेंगे, जैसे कि हम कई दूसरी सामान्य बीमारियों और वायरल इंफेक्शन की निगरानी करते हैं। सभी डेटा पब्लिशर्स को लगातर रिव्यू करने को कहा गया है, ताकि अगर जरूरत हो तो इस मॉडलिंग डेटा को तुरंत दोबारा से जारी किया जा सके। खासतौर से तब, जब कोई खास वेरिएंट या स्ट्रेन सामने आता है।"
EMRG ने ये भी बताया कि कोरोना वायरस से जुड़ा अगला डेटा 6 जनवरी 2023 को जारी किया जाएगाा और ये ही Covid-19 का आखिरी आधिकारिक डेटा होगा। UK का COVID-19 डेटा ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ONS) संक्रमण सर्वे से लिया जा सकत है।
लक्षणों के साथ घर पर सेल्फ-आइसोलेट करने की कानूनी जरूरत समेत देश के बाकी कोरोना प्रतिबंधों को इस साल की शुरुआत में हटा दिया गया था। सर्दियों के महीनों में संक्रमण में अपेक्षित बढ़ोतरी के बीच, स्वास्थ्य अधिकारियों ने उन लोगों से आग्रह किया था, जिनमें सांस की बीमारी के लक्षण हैं, वे त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ से बचें और अपना ध्यान रखें।
चीन की राह पर ब्रिटेन, कितना सही ये फैसला?
इससे पहले चीन ने भी आधिकारिक तौर पर Covid-19 का डेटा करने पर रोक लगा दी है। चीन के कैबिनेट स्तर के कार्यकारी विभाग, नेशनल हेल्थ कमीशन (NHC) ने 25 दिसंबर से अपने डेली Covid-19 नंबरों को दैनिक आधार पर जारी नहीं करने का फैसला लिया है।
NHC ने ग्लोबल टाइम्स को बताया, "चीन का नेशनल हेल्थ कमीशन (NHC) रविवार से डेली COVID-19 केस डेटा जारी करना बंद कर देगा। इसके बजाय, चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन COVID-19 से जुड़ी जानकारी को स्टडी और रेफ्रेंस के लिए जारी करेगा।"
चीन में कोरोना वायरस को काबू करने लिए अपनाई गई सख्त जीरो कोविड पॉलिसी का भी कुछ खास असर नहीं दिखा। लोगों के विरोध पर दिसंबर की शरुआत में जैसे ही इस नीति में ढील दी गई, तो उसकी तैयारियों की सारी पोल खुल गई।
आलम ये है कि चीन में अस्पताल भरे पड़े हैं। ICU भरे पड़े हैं और लोगों की इलाज कराने के लिए बेड तक नहीं मिल रहे हैं। ऐसे कई एक्सपर्ट्स और स्टडी में ऐसी आशंकाएं जताई गई हैं कि चीन में अगले 3 से 6 महीने काफी घातक साबित हो सकते हैं। ऐसा अनुमान है कि अगले 6 महीनों में करीब साढ़े 10 लाख लोगों की जान जा सकती है।
जहां चीन, अमेरिका, जापान, साउथ कोरिया और जापान में इन दिनों संक्रमण बड़ी ही तेजी से पैर पसार रहा है, तो वहीं दूसरे देश भी इस ट्रेंड को देखते हुए अलर्ट हैं। ऐसे में ब्रिटेन का ये फैसला कितना सही है, वो सोचने लायक है।