कनाडा में जस्टिन ट्रूडो की सरकार प्रवासियों को लेकर सख्त नजर आ रही है। देश में विदेशी छात्रों के भविष्य पर खतरा मंडराने लगा है। करीब 7 लाख विदेशी छात्रों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई है। दरअसल, कनाडा में साल 2025 के आखिरी तक करीब 50 लाख अस्थायी परमिट खत्म होने वाले हैं। ऐसे में कनाडा के इमिग्रेशन अथॉरिटी (immigration authorities) को उम्मीद है कि परमिट खत्म होने के बाद ज्यादातर प्रवासी छात्र कनाडा छोड़ देंगे। कनाडा के इमिग्रेशन मंत्री (Immigration Minister) मार्क मिलर (Marc Miller) ने पिछले हफ्ते की शुरुआत में इस बात की जानकारी दी है।
इन 50 लाख परमिटों में से 7 लाख परमिट विदेशी छात्रों के हैं। ये छात्र हाल ही में ट्रूडो सरकार के प्रवासी विरोधी नीतियों की वजह से चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। बता दें कि कनाडा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय छात्र परमिट की संख्या में कमी करने का निर्णय लिया है। साल 2024 में छात्र परमिट में 35 फीसदी की कटौती कर दी है। फिर 2025 में इसमें 10 फीसदी की और कमी का लक्ष्य रखा गया है। इन नीतिगत बदलावों का मकसद छात्रों के स्वागत और घरेलू आवास चुनौतियों के बीच संतुलन बनाए रखना है।
कनाडा में मई 2023 तक 10 लाख से अधिक विदेशी छात्र मौजूद थे। जिनमें से 396,235 छात्रों के पास पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट है। यह संख्या 2018 के मुकाबले 3 गुना ज्यादा है। हालांकि बड़ी संख्या में पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट अगले साल खत्म होने वाले हैं। जिससे स्थायी निवास की उम्मीद रखने वाले छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं। ब्रैम्पटन में पंजाब के छात्रों ने नीतिगत बदलावों का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया है। उनका मानना है कि ये बदलाव कनाडा में रहने और स्थायी निवास पाने की उनकी संभावनाओं को प्रभावित कर रहे हैं।
बता दें कि वर्क परमिट आम तौर पर नौ महीने से तीन साल के लिए जारी किए जाते हैं। ये डिप्लोमा या डिग्री वाले विदेशी छात्रों को देश में परमानेंट रेजिडेंसी के लिए काम आता है। मिलर ने कहा है कि कनाडा सीमा सेवा एजेंसी उल्लंघन करने वालों की सख्ती से जांच करेगी। उन्होंने जानकारी दी है कि सभी अस्थायी प्रवासियों को जाने की जरूरत नहीं होगी। मिलर ने कहा कि कुछ को नए या पोस्ट ग्रेजुएट वर्क परमिट दिए जाएंगे। पिछले महीने की शुरुआत में मिलर ने चिंता व्यक्त की कि छात्र बड़ी संख्या में कनाडा में रहने के लिए आवेदन कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि वे फर्जी आवेदकों को बाहर निकालने की प्रक्रिया में तेजी लाएंगे।