चीन (China) की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में से एक एवरग्रैंड ग्रुप (Evergrande Group) पर पहली बार आधिकारिक तौर पर 'डिफॉल्टर' का ठप्पा लगा है। लोन की राशि को समय पर नहीं चुका पाने वाली कंपनी या व्यक्ति को डिफॉल्टर कहा जाता है। एवरग्रैंड इस समय दुनिया की सबसे ज्यादा कर्ज में डूबी रियल एस्टेट कंपनी है। पिछले कई महीनों से इस कंपनी को लेकर चीन में फाइनेंशियल ड्रामा चल रहा है, जिसके बाद इसने कर्ज चुकाने के लिए कंपनी में भारी रिस्ट्रक्चरिंग की थी।
इस बीच फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने एवरग्रैड ग्रुप की रेटिंग घटा कर उसे 'डिफॉल्ट' कैटेगरी में डाल दिया। फिच ने एक बयान में बताया कि कंपनी ने ग्रे पीरियड जाने के बाद भी दो कूपन पेमेंट का भुगतान नहीं कर पाई है, जिसके चलते उसने उसे 'डिफॉल्ट' कैटेगरी में डाल दिया है।
फिच ने बताया कि उससे इन पेमेंट को लेकर कंपनी से जानकारी भी मांगी थी, लेकिन एवरग्रैंड की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। फिच ने कहा कि इससे हम यह मानकर चल रहे हैं कि कंपनी ने पेमेंट पर डिफॉल्ट किया है। एवरग्रैंड ग्रुप पर इस समय करीब 300 अरब डॉलर का कर्ज है और इस डिफॉल्ट रेटिंग से उसकी मुश्किलें और बढ़ सकती है।
एवरग्रैंड चीन की सबसे बड़ी रीयल एस्टे कंपनियों में से एक है। इसकी स्थापना 1996 में ग्वांझगू शहर में हुई थी। कभी यह विशाल कंपनी चीन के रियल एस्टेड इंडस्ट्री का चेहरा हुआ करती थी। इसने चीन के करीब 280 शहरों में करोड़ों लोगों के घर का सपना पूरा किया है। लेकिन अब इस पर 19.2 अरब डॉलर का पहाड़ जैसा कर्ज आ गया है और कंपनी इसे चुका पाने में असमर्थ है। एक अनुमान के मुताबिक, अगर कंपनी के सारे अधूरे प्रोजेक्ट्स और इसकी संपत्तियों को बेचकर कर्ज की वसूली की जाए, तो भी कर्ज की आधी राशि ही मुश्किल से निकल पाएगी।
ऐसे में इस कंपनी ने पूरे चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर परेशानी खड़ा कर दिया है। एक्सपर्ट को डर है कि एवरग्रैंड के धराशायी होने से चीन का रियल एस्टेट मार्केट लंबे समय के लिए बैठ जाएगा। ऐसे में चीन सरकार इस कर्ज संकट को टालने की कोशिश में लगी हुई है।
चीन सरकार को शुरुआत में इसमें थोड़ी सफलता भी मिली थी, लेकिन बाद में हालात फिर से जस के तस हो गए। इसल बीच एवरग्रैंड ग्रुप ने बीते सोमवार को ऐलान किया कि वह एक रिस्क मैनेजमेंट कमेटी का गठन कर रही है। कंपनी ने बताया कि इस रिस्क मैनेजमेंट कमेटी का मकसद भविष्य के जोखिमों से बचाव करना और कर्ज की राशि को कम करने में मदद करना है। देखना होगा की शी जिनपिंग की अगुआई वाली चीन सरकार इस मुश्किल से कैसे बचती है?