चीन की आर्थिक गतिविधियां हुईं ठप, Xi Jinping की Covid Policy पड़ रही भारी

चीन की अर्थव्यवस्था देश की कोविड जीरो पॉलिसी (Covid Zero policy) की बड़ी कीमत चुका रही है। इंडस्ट्रियल आउटपुट और कंज्यूमर स्पेंडिंग महामारी की शुरुआत के बाद के अपने निचले स्तर पर पहुंच गई है

अपडेटेड May 17, 2022 पर 9:41 AM
एनालिस्ट्स ने हाल फिलहाल चीन में कोई रिकवरी नहीं होने की चेतावनी दी है

China Economy : चीन की अर्थव्यवस्था देश की कोविड जीरो पॉलिसी (Covid Zero policy) की बड़ी कीमत चुका रही है। इंडस्ट्रियल आउटपुट और कंज्यूमर स्पेंडिंग महामारी की शुरुआत के बाद के अपने निचले स्तर पर पहुंच गई है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एनालिस्ट्स ने हाल फिलहाल कोई रिकवरी नहीं होने की चेतावनी दी है।

एक साल पहले की तुलना में अप्रैल में इंडस्ट्रियल आउटपुट अप्रत्याशित रूप से 2.9 फीसदी कम हो गया। वहीं, रिटेल सेल्स में 11.1 फीसदी की कमी दर्ज की गई है, जो 6.6 फीसदी गिरावट के अनुमान से काफी कम है। बेरोजगारी दर बढ़कर 6.1 फीसदी हो गई है और युवाओं की बेरोजगारी दर अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इनवेस्टर्स ने चीनी शेयरों से लेकर यूएस इंडेक्स फ्यूचर्स और तेल में बिकवाली करके तगड़ी प्रतिक्रिया दी है।

चीन सरकार की बढ़ी चिंता


चीन के मुख्य फाइनेंशियल न्यूजपेपर्स ने सोमवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग (President Xi Jinping) के छह महीने पुराने भाषण को प्रकाशित किया, जिसमें नौकरियों को सुरक्षित करने और विकास को गति देने की जरूरत पर जोर दिया गया। इस तरह उन्होंने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यकता का संकेत दिया था। बेरोजगारी में बढ़ोतरी इस साल के आखिर में एक दशक में दूसरी बार नेतृत्व में बदलाव से पहले कम्युनिस्ट पार्टी के लिए बड़ी चिंता के रूप में सामने आई है, जिसमें शी की तीसरी बार ताजपोशी की उम्मीद है।

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बढ़ रही है बेरोजगारी

मैक्वायरी ग्रुप के हेड (चाइना इकोनॉमिक्स) लैरी हू ने कहा, “अप्रैल में इकोनॉमिक ग्रोथ की तुलना में जीरो कोविड को तरजीह दी गई, लेकिन पूरे साल के लिए वे दोनों को हासिल करना चाहते हैं। कुल मिलाकर बेरोजगारी में बढ़ोतरी की कीमत पर जीरो-कोविड हासिल करना राजनीतिक रूप से बहुत नुकसानदेह है, विशेष रूप से तब जब यह साल राजनीतिक रूप से इतना अहम हो।”

जीडीपी में गिरावट

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के मुताबिक, सोमवार के डाटा से पता चलता है कि एक साल पहले की तुलना में अप्रैल में जीडीपी में 0.68 फीसदी की कमी देखने को मिली, जो फरवरी, 2020 के बाद पहली गिरावट है। यूबीएस ग्रुप एजी के मुताबिक, दूसरी तिमाही में ग्रोथ कमजोर होकर 2 फीसदी से नीचे रह सकती है, वहीं एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने ग्रोथ 0.5 फीसदी तक कमजोर रहने का अनुमान लगाया है।

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आगे आएंगी कई चुनौतियां

मॉर्गन स्टैनली के चीफ एशिया इकोनॉमिस्ट चेतन अहिया ने कहा, संभवतः अप्रैल में सप्लाई चेन का दबाव उच्चतम स्तर पर था और आगे कुछ सुधार की उम्मीदें हैं। ब्लूमबर्ग टीवी से बातचीत में उन्होंने कहा, “अगले कुछ हफ्तों में सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दे सुलझने की उम्मीद है। और, शंघाई का खुलना निश्चित रूप से एक अहम फैक्टर है, जिस पर हमारी नजर है। अब बाकी दुनिया के लिए कई चुनौतियां पैदा होने जा रही हैं, लेकिन सबसे खराब दौर पीछे छूट चुका है।”

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