Chinese Banks Cash Crisis : वैसे तो ज्यादा कैश होना बैंकों और कंपनियों के लिए अच्छी बात है। लेकिन चीन सरकार के लिए, इन दिनों यही बात एक बड़ी मुसीबत हो गई है। दरअसल, कोविड महामारी और लॉकडाउन के चलते कंपनियों और परिवारों का भरोसा इतना कमजोर हो गया है कि वहां पर कोई कर्ज लेने को तैयार नहीं है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में लोन ग्रोथ (loan growth) लगभग पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है और कई इंडीकेटर्स से संकेत मिल रहे हैं कि मई में भी हालात में सुधार की उम्मीद नहीं है। घरों की बिक्री लगातार घटना मॉर्टगेज की डिमांड घटने के संकेत हैं और रियल एस्टेट कंपनियों के बीच क्रेडिट की मांग कमजोर बनी हुई है। क्लाइंट्स की कमी के चलते बैंक आपस में बिलों की अदलाबदली कर रहे हैं, जिससे कॉर्पोरेट लेंडिंग के लिए रेगुलेटरी शर्तों को पूरा कर सकें।
इन वजहों से कम है क्रेडिट डिमांड
कर्ज लेने के प्रति बेरुखी की मुख्य वजह चीन की कोविड बंदिशों के प्रति अनिश्चितता है। साथ ही लोगों के मन में यह आशंका भी बनी हुई है कि भविष्य में महामारी के चलते फिर से लॉकडाउन लग सकते हैं। वहीं उत्पादन ठप हैं और छंटनी जारी है। रेवेन्यू घट चुका है और प्रॉफिट लगातार कम हो रहा है। कई कंपनियों ने एक्सपैंशन प्लान पर रोक लगा दी है।
तीसरी तिमाही में कमजोर हो सकती है इकोनॉमी
ऑस्ट्रेलिया एंड न्यूजीलैंड बैंकिंग ग्रुप में सीनियर चाइना स्ट्रैटेजिस्ट जिंग झाओपेंग ने कहा, सुस्त क्रेडिट डिमांड से बाजार की कमजोर होती उम्मीदों और बिजनेस एक्सपैंशन में सुस्ती की ओर संकेत मिलते हैं। इससे स्पष्ट है कि चीन की इकोनॉमी तीसरी तिमाही में कमजोर हो सकती है, क्योंकि कई इनवेस्टमेंट एक्टिविटी सिर्फ लोन से ही पूरी हो सकती हैं।
पॉलिसीमेकर्स बना रहे बैंकों पर दबाव
पॉलिसीमेकर्स के लिए हालात चुनौतीपूर्ण हैं, जो बैंकों को ज्यादा कर्ज देने के लिए दबाव बना रहे हैं। पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने पिछले हफ्ते सभी लेंडर्स से लोन बढ़ाने के लिए कहा। साथ ही उसने मॉर्टगेज रेट्स में कमी करने और प्रॉपर्टी सेक्टर में लेंडिंग में स्थायित्व लाने का आह्वान किया है।