तालिबान (Taliban) ने 16 जुलाई को भारतीय फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी (Danish Siddiqui) की मौत में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया। दानिश कंधार में अफगान सुरक्षा बलों के साथ रहते हुए मारे गए थे। CNN-News18 से बात करते हुए, तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा, “हमें नहीं पता कि पत्रकार किसकी फायरिंग के दौरान मारा गया था। हम नहीं जानते कि उसकी मौत कैसे हुई।"
उन्होंने सिद्दीकी की मौत पर खेद भी जताया, लेकिन कहा कि पत्रकारों को युद्ध क्षेत्रों में प्रवेश करते समय उन्हें "जानकारी" देनी चाहिए। मुजाहिद ने कहा, "वॉर जोन में एंट्री करने वाले किसी भी पत्रकार को हमें सूचित करना चाहिए। हम उस व्यक्ति विशेष की अच्छी देखभाल करेंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "हमें खेद है कि पत्रकार हमें बिना बताए युद्ध क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी के निधन पर हमें खेद है।"
पुलित्जर पुरस्कार (Pulitzer Prize) विजेता, सिद्दीकी ने रॉयटर्स (Reuters) के साथ काम किया। वह 15 जुलाई को कंधार के स्पिन जिले में हुए संघर्ष को कवर करते हुए मारे गए। ये जिला पाकिस्तान के बॉर्डर पर स्थिति है, जिसे अब तालिबान ने अपने कब्जे में ले लिया है।
पुलित्जर पुरस्कार विजेता पत्रकार
2018 में, सिद्दीकी सात सदस्यीय रॉयटर्स टीम में दो भारतीयों में से एक थे, जिन्होंने अपनी सीरीज के लिए फीचर फोटोग्राफी के लिए पुलित्जर पुरस्कार जीता। उसमें रोहिंग्या शरणार्थी के संकट को दिखाया गया था।
एक फोटो जर्नलिस्ट के रूप में अपने समय में, सिद्दीकी ने एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप में कई स्टोरीज को कवर किया, जैसे अफगानिस्तान और इराक में युद्ध, रोहिंग्या शरणार्थियों का संकट, हांगकांग विरोध, नेपाल भूकंप, उत्तर कोरिया में बड़े पैमाने पर खेल और स्विट्जरलैंड में शरण चाहने वालों की रहने की स्थिति।