पाकिस्तान की आर्थिक हालात लगातार बिगड़ रही है। कुछ दिन पहले पाकिस्तान के प्लानिंग मिनिस्टर अहसन इकबाल ने लोगों से कम चाय पीने को कहा। पेट्रोल-डीजल सहित रोजमर्रा की चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं। विदेशी मुद्रा भंडार काफी घट चुका है। पाकिस्तान रुपया की वैल्यू काफी गिर गई है। तो क्या पाकिस्तान श्रीलंका के रास्ते पर है?
पाकिस्तान आर्थिक मदद के लिए इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) से बातचीत कर रहा है। वह आईएमएफ से 6 अरब डॉलर की मदद चाहता है। बताया जाता है कि IMF ने आर्थिक मदद देने के लिए पाकिस्तान के सामने कड़ी शर्तें रखी हैं। इनमें बिजली के टैरिफ बढ़ाना और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर लेवी शामिल हैं।
बताया जाता है कि IMF ने पाकिस्तान को एंटी-करप्शन टास्क फोर्स बनाने को भी कहा है। यह टास्क फोर्स उन सभी कानूनों की समीक्षा करेगा, जो सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए बनाए गए हैं। पाकिस्तान के अखबार Dawn ने कहा है कि अगर पाकिस्तान इन शर्तों को मान लेता है तो उसे आर्थिक मदद शुरू करने का प्रस्ताव एग्जिक्यूटिव बोर्ड में रखा जाएगा।
पाकिस्तान रुपया में इस साल बड़ी गिरावट आई है। गुरुवार को डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया 206 के स्तर पर था। 21 जून को यह 212 के स्तर पर पहुंच गया था। एक साल में यह 30 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार बहुत गिर गया है। यह 9 अरब डॉलर से नीचे चला गया है। यह सिर्फ छह हफ्ते के आयात के लिए पर्याप्त है।
पिछले एक महीने में पाकिस्तान की सरकार ने पेट्रोल की कीमतें तीन बार बढ़ाई हैं। इसका असर दूसरी सेवाओं पर पड़ा है। खबर है कि कैब सर्विसेज, रेस्टोरेंट्स और होम डिलीवरी सेवाएं बंद हो रही हैं। इससे लोगों को परेशानी हो रही है। लोगों में सरकार के खिलाफ गुस्सा है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि खानेपीने की चीजों की कीमतों में वृद्धि, महंगे पेट्रोल और डीजल, छोटे कारोबार पर लग रहे ताले और अस्थिर राजनीतिक हालात के चलते पाकिस्तान पर दूसरी बार डिफॉल्ट का खतरा मंडरा रहा है। इस बीच, प्रमुख राजनीतिक दलों में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खराब वित्तीय स्थिति का ठीकरा पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के सिर फोड़ा है।