Meta Lay off: दिग्गज सोशल मीडिया कंपनी मेटा फेसबुक (Facebook) की पैरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms) में हाहाकार मचा हुआ है। 11 हजार से अधिक कर्मियों को आज कंपनी ने बाहर निकाल दिया। यह कंपनियों के कुल कर्मियों का 13 फीसदी है। इसके अलावा कंपनी ने नई हायरिंग पर जो रोक लगाया हुआ है, उसे बढ़ाने पर भी काम कर रही है।
मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) ने कहा कि वह इन फैसलों की जवाबदेही लेना चाहते हैं और जिस तरह से कंपनी यहां पहुंची है, उसकी भी। जुकरबर्ग के मुताबिक वह जानते हैं कि यह सभी के लिए कठिन है। उन्होंने कहा कि जो भी इस फैसले से प्रभावित हुए हैं, उनसे वह माफी मांगते हैं। मेटा के इतिहास की यह अब तक की सबसे बड़ी छंटनी है।
अगले साल मार्च तक बंद रहेगी हायरिंग
जुकरबर्ग ने एंप्लॉयीज को जो मैसेज भेजा है, उसके मुताबिक अगले साल मार्च तक नई हायरिंग नहीं होगी। जुकरबर्ग के मुताबिक कंपनी ने यह फैसला अपने खर्चों को घटाने के लिए लिया है। महामारी के दौरान ई-कॉमर्स सेक्टर तेजी से बढ़ा और माना जा रहा था कि महामारी के बाद भी इसकी ग्रोथ बेहतर रहेगी जिसके चलते कंपनी ने इसमें निवेश किया लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसके अलावा मैक्रोइकनॉमिक सुस्ती, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और विज्ञापनों में कमी ने भी रेवेन्यू पर निगेटिव इफेक्ट डाला यानी कि कंपनी के अनुमान के मुताबिक नहीं बढ़ा। इस वजह से कंपनी ने खर्च घटाने के लिए छंटनी का फैसला किया। जुकरबर्ग ने यह भी कहा कि जिन लोगों को कंपनी से निकाला गया है, उन्हें स्थानीय रोजगार कानून के मुताबिक अलग प्रक्रिया के तहत सेवेरेंस दिया जाएगा। सेवेरेंस का मतलब है कि जब कोई एंप्लॉयी कंपनी छोड़ते हैं तो उन्हें कंपनी की तरफ से रिइंबर्समेंट दिया जाता है।
Meta के अलावा इन कंपनियों में भी छंटनी की मार
मेटा से पहले कुछ और तकनीकी कंपनियों में भी छंटनी की मार कर्मियों पर पड़ चुकी है। स्ट्राइप, अमेजन, लिफ्ट, कॉइनबेस, एप्पल और स्नैप समेत कई तकनीकी कंपनियों में बढ़ती महंगाई और मैक्रोइकनॉमिक स्तर पर बढ़ती चुनौतियों के चलते छंटनी और हायरिंग पर रोक का ऐलान हो चुका है। ट्विटर हाल ही में 7500 लोगों को निकाल चुकी है। स्नैप ने अपने वर्कफोर्स में 20 फीसदी की कटौती की है।