अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ने बुधवार को लगातार दूसरे महीने ब्याज दरों (Interest Rates) में 0.75 प्रतिशत का इजाफा किया। अमेरिका में लगातार बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए फेडरल रिजर्व ने कई दशकों में पहली बार ब्याज दरों में इतने आक्रामक तरीके से बढ़ोतरी की है। हालांकि इससे अमेरिकी अर्थव्यस्था को एक तेज झटका लगने का जोखिम है।
अमेरिकी में महंगाई पिछले 40 सालों के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने का खतरा है। फेडरल रिजर्व अमेरिका की अर्थव्यवस्था को कोई धक्का पहुंचाए बिना महंगाई को काबू में करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और उसके मंदी में जाने से पूरी दुनिया के आर्थिक ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।
फेडरल रिजर्व जून और जुलाई को मिलाकर ब्याज दरों में कुल 1.50 फीसदी बढ़ोतरी कर चुकी है, जो 1980 के दशक के बाद की सबसे तेज बढ़ोतरी है। साथ ही फेडरल रिजर्व ने इस साल चौथी ब्याज दरों को बढ़ाया है।
साथ ही उसने बुधवार को फेडरल फंड्स के लिए टारगेट रेंज बढ़ाकर 2.25% से 2.5% कर दिया। फेडरल रिजर्व ने एक बयान में कहा कि वह महंगाई के अपने 2 फीसदी के लक्ष्य पर वापस आने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही उसने कहा कि वह महंगाई से जुड़े जोखिम पूरी तरफ से ध्यान बनाए हुए है।
फेडरल रिजर्व ने महंगाई के अपने लक्ष्य पर जोर देते हुए कहा, "उम्मीद है कि टारगेट रेंज में मौजूदा बढ़ोतरी उचित होगी।" साथ ही यह किसी तरह का जोखिम सामने आने पर पॉलिसी को उसके मुताबिक एडजस्ट करने में मदद करेगा, जिससे लक्ष्यों को हासिल करने में किसी तरह की बाधा न आए।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि यूक्रेन के खिलाफ रूस की लड़ाई "जबरदस्त मानवीय और आर्थिक कठिनाई पैदा कर रही है"। साथ ही यह "महंगाई पर अतिरिक्त दबाव" और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर भार डाल रहा है। फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का अभी तक अमेरिका में बहुत कम असर हुआ है और भोजन और गैस से लेकर किराए वाली वस्तुएं तक हर चीज की लागत ऊंची बनी हुई है।