पहली बार देखने पर लगता है कि फैशन स्टार्टअप Zilingo अचानक डगमगाने लगी। लेकिन, यह सच नहीं है। जिलिंगो की बर्बादी की कहानी की शुरुआत इस साल मार्च में ही हो गई थी। आइए जानते हैं बड़े-बड़े दावे करने वाली जिलिंगों आखिर कैसे धराशायी हो गई।

पहली बार देखने पर लगता है कि फैशन स्टार्टअप Zilingo अचानक डगमगाने लगी। लेकिन, यह सच नहीं है। जिलिंगो की बर्बादी की कहानी की शुरुआत इस साल मार्च में ही हो गई थी। आइए जानते हैं बड़े-बड़े दावे करने वाली जिलिंगों आखिर कैसे धराशायी हो गई।
सिंगापुर की जिलिंगो ने मार्च में 30 साल की अपनी सीईओ अंकिती बोस को सस्पेंड कर दिया। उन पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगे। कुछ ही हफ्तों में इस स्टार्टअप को कर्ज देने वालों ने अपने पैसे मांगने शरू कर दिए। 100 से ज्यादा एंप्लॉयीज ने नौकरी छोड़ दी। अब कंपनी के वजूद को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
Zilingo की बर्बादी की कहानी ने दक्षिणपूर्व एशिया से और उससे बाहर की टेक इंडस्ट्री को हिला दिया है। इस स्टार्टअप ने कई बड़े इनवेस्टर्स से 30 करोड़ डॉलर से ज्यादा पैसे जुटाए थे। इनमें Temasek Holdings और Sequoia Capital India तक शामिल थे।
बोस ने किसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी में शामिल होने से इनकार किया है। लेकिन, बताया जाता है कि इस सीईओ के काम करने का तरीका बहुत हाई प्रोफाइल था। वह दुनियाभर में घूमती थीं। हांगकांग से लेकर कैलिफोर्निया में होने वाली टेक्नोलॉजी के प्रोग्राम में उनके लेक्चर होते थे।
60 से अधिक जिलिंगो के वर्तमान और पूर्व एंप्लॉयीज, मर्चेंट्स, इनवेस्टर्स, आंत्रप्रेन्योर्स आदि से बात करने के बाद पता चला कि बोस के नेतृत्व में जिलिंगो कई साल से संघर्ष कर रही थी। उनके तहत काम कर चुके लोगों का कहना है कि मैनजमेंट के उनके स्टाइल ने एंप्लॉयीज को उनसे दूर कर दिया। इससे बिजनेस को बहुत नुकसान पहुंचा।
सेल्स बढ़ाने के लिए जिलिंगो कभी कुछ तो कभी कुछ स्ट्रैटेजी बनाती रही। इनमें 10 लाख डॉलर का मोरक्को का प्रमोशनल टूर, कस्टमर्स को लोन और अमेरिकी में थोड़ा समय बिताने जैसे ऑफर शामिल थे। जापान के टेक टाइटन माने जाने वाले मासायोशी सोन का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक समय बोस ग्रोथ को लेकर पागल हो गई थीं।
जेलिंग की दुर्दशा में बोस और लंबे समय तक उनके सपोर्टर रहे शैलेंद्र सिंह के रिश्ते खराब होने का भी योगदान है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि शैलेंद्र सिंह Sequoia India के हेड हैं। दोनों के बीच सालों तक अच्छे रिश्ते रहे। लेकिन, वित्तीय दबाव बढ़ने पर यह रिश्ता टूट गया।
शैलेंद्र का भरोसा उस युवा फाउंडर के मैनेजमेंट स्टाइल से टूटने लगा, जिसका उन्होंने कई सालों तक साथ दिया था। उधर, बोस का आरोप है कि शैलेंद्र ने उनके साथ धोखा किया। शैलेंद्र ने बोस को उन्हीं की कंपनी से बाहर करवा दिया।
एक समय दोनों की लड़ाई इतनी बढ़ गई कि मई में Sequoia के वकीलों ने बोस को लीगल नोटिस भेज दिया। इसमें कहा गया कि वह (बोस) Sequoia पर आरोप लगाना बंद करें, क्योंकि इससे इसकी छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
जिलिंगो का मामला कंपनी के अंदर के कमजोर कॉर्पोरेट गवर्नेंस की पोल खोलता है। स्टार्टअप इंडस्ट्री के लिए यह कोई नई बात नहीं है। जिलिंगो ने दो साल तक एनुअल रिटर्न फाइल नहीं किया। सिंगापुर में किसी कंपनी के लिए यह जरूरी शर्त है। ऑडिटर KPMG LLP ने अभी तक फाइनेंशियल ईयर 2019-20 के जिलिंगो के रिजल्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
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