टेक इंडस्ट्री पर चीन के मॉडल से सबक ले भारत, बढ़ाए कंट्रोल : विवेक वाधवा

चीन ने एक कानून पारित किया जो अल्गोरिदम पर कंट्रोल की कोशिश करता है और यह इन प्लेटफॉर्म्स के कामकाज के केंद्र में है

अपडेटेड Jan 28, 2022 पर 2:29 PM
वाट्सऐप दुष्प्रचार का पर्याय बन गया है और फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म्स ने फीचर्स का पर्नलाइजेशन कर दिया है

Vivek Wadhwa : हावर्ड लॉ स्कूल और कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डिस्टिंग्युश्ड फेलो, ऑथर और एंटरप्रेन्योर विवेक वाधवा ने कहा कि भारत को टेक्नोलॉजी कंपनियों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए चीन के उदाहरण को अपनाना चाहिए। उन्होंने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में यह बात कही।

चीन को हुआ नुकसान का अहसास

उन्होंने कहा, “मैं चीन का कम ही समर्थन करता हूं, लेकिन वहां की सरकार को इन टेक्नोलॉजिस की वजह से हो रहे नुकसान का अहसास हो चुका है। वे अब पोलराइजिंग के संकट के प्रबंधन में दुनिया की अगुआई कर रहे हैं।” वह टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा अपने प्लेटफॉर्म्स पर इंगेजमेंट बढ़ाने के लिए ओपीनियन की पोलराइजिंग के तरीके के बारे में बात कर रहे थे। उनका मानना है कि भारत में धार्मिक कट्टरता के उभार की भी यही वजह हो सकती है।


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कंपनियां नुकसान के प्रति हुईं जागरूक

वाट्सऐप दुष्प्रचार का पर्याय बन गया है और फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म्स ने फीचर्स का पर्नलाइजेशन कर दिया है, जिससे विचार फिल्टर हो जाते हैं और इससे लोगों के बीच विभाजन गहरा हुआ है। कंपनियां खुद को हो रहे नुकसान के प्रति जागरूक हो गई हैं, लेकिन वे हुक यूजर्स के फीचर्स को बनाए हुए हैं।

चीन में दुष्प्रचार पर कंपनियां हैं जिम्मेदार

उन्होंने कहा, “चीन इस उद्योग पर शिकंजा कस रहा है। वे अल्गोरिदम को रेगुलेट करने की कोशिश कर रहे हैं, वे बेहतर प्राइवेसी कंट्रोल के लिए कह रहे हैं और उनसे कह रहे हैं कि अगर प्लेटफॉर्म्स पर दुष्प्रचार हो रहा है तो उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। इसलिए, यदि वीचैट (चीन का ऐप जो मेसेजिंग, पेमेंट्स और सोशल मीडिया कनवर्सेशन को सपोर्ट करता है) दुष्प्रचार फैला रह है तो उसके अधिकारियों को जेल हो सकती है। भारत को सचेत होना चाहिए और ऐसा करना चाहिए।”

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चीन ने बनाया कानून

इस महीने की शुरुआत में, चीन ने एक कानून पारित किया जो अल्गोरिदम पर कंट्रोल की कोशिश करता है और यह इन प्लेटफॉर्म्स के कामकाज के केंद्र में है। कंपनियां उस अल्गोरिदम का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं जो किसी देश के कानून के खिलाफ हो जिससे नेशनल सिक्योरिटी खतरे में पड़ती हो। अगस्त 2021 में चीन ने एक डाटा प्राइवेसी लॉ पारित किया जो टेक कंपनियों को अपने यूजर डाटा की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए बाध्य करता है। कंपनियों को अब डाटा की माइनिंग से पहले यूजर की सहमति लेनी होगी, देश के बाहर डाटा भेजने से पहले गाइडलाइंस का पालन करना होगा। साथ ही डाटा की उचित हैंडलिंग सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर ऑडिट कराना होगा।

 

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