हमारी अर्थव्यवस्था (Indian Economy) तेज ग्रोथ के रास्ते पर लौट रही है। लोगों को नौकरियां मिलनी भी शुरू हो गई हैं। इससे घरों की मांग बढ़ सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) अगर घर खरीदारों के लिए कुछ उपायों का ऐलान बजट (Budget) में करती हैं तो इससे रियल एस्टेट सेक्टर में चमक लौट सकती है। आइए ऐसे 5 उपायों के बारे में जानते हैं जिनका ऐलान वित्त मंत्री 1 फरवरी (Budget Date) को कर सकती हैं। वह 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। यह उनका चौथा बजट होगा।
1. प्रिसिपल रीपेमेंट पर अलग से डिडक्शन की सुविधा
लोन लेकर घर खरीदने वालों लोगों के लिए प्रिंसिपल रीपेमेंट पर अलग से डिडक्शन की सुविधा मिलनी चाहिए। अभी इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80 के तहत प्रिंसिपल रीपेमेंट पर डिडक्शन की सुविधा मिलती है। चूंकि, इस सेक्शन में पीपीएफ, ईएलएसएस, ट्वयूशन फीस जैसी कई चीजें शामिल हैं, जिससे प्रिंसिपल रीपेमेंट पर डिडक्शन के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं बचती है। इसलिए होम लोन के ग्राहकों के लिए 80सी से अलग डिडक्शन की सुविधा दी जा सकती है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) की अवधि बढ़ानी चाहिए। एमआईजी सेगमेंट में आने वाले ग्राहकों के लिए मार्च 2021 तक उपलब्ध था। इकोनॉमिक वीकर सेक्शन (EWS) और लोअर इनकम ग्रुप (LWG) के लिए यह स्कीम 31 मार्च, 2022 तक उपलब्ध है। इस स्कीम का लाभ सभी इनकम ग्रुप के लोगों के लिए कम से कम एक साल के लिए बढ़ा देना चाहिए। इससे अफोर्डेबल घरों की मांग बढ़ेगी। लोगों को भी घर खरीदने में आसानी होगी।
3. सेक्शन 80ईईए के तहत अतिरिक्त डिडक्शन की अवधि बढ़ाई जाए
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80ईईए के तहत पहली बार घर खरीदने वाले लोगों को होम लोन के इंट्रेस्ट पेमेंट पर 1.5 लाख रुपये का अतिरिक्त डिडक्शन मिलता है। पिछले साल पेश बजट में इस स्कीम को बढ़ाकर 31 मार्च, 2022 तक कर दिया गया था। अभी होम लोन की ब्याज दर बहुत कम है। इसलिए इस स्कीम को बढ़ाने से बड़ी संख्या में घर खरीदारों को फायदा होगा।
4. हाउस प्रॉपर्टी से लॉस को सेट-ऑफ करने की लिमिट बढ़े
फाइनेंस बिल, 2017 में हाउस प्रॉपर्टी से हुए लॉस को किसी दूसरी इनकम के साथ सेट-ऑफ करने के लिए 2 लाख रुपये की लिमिट तय कर दी गई थी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को इस लिमिट को हटाने की जरूरत है। इससे टैक्सपेयर्स को बहुत फायदा होगा। वह किराए पर दिए अपनी प्रॉपर्टी पर बगैर किसी लिमिट पूरे इंट्रेस्ट को क्लेम कर सकेगा। इससे खरीदी गई प्रॉप्रटी पर टैक्स-बाद मिलने वाला रिटर्न बढ़ जाएगा।
5. अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स को जीएसटी से छूट मिले
अभी ग्राहक पूरा हो चुके प्रोजेक्ट्स में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। अगर अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स को जीएसटी से छूट दी जाए तो ग्राहक ऐसे प्रोजेक्ट्स में भी दिलचस्पी दिखाएंगे। उनके लिए ज्यादा प्रोजेक्ट्स के विकल्प भी उपलब्ध होंगे। इसका फायदा रियल एस्टेट कंपनियों को भी मिलेगा। उनके खाली पड़े घरों की संख्या घटेगी।