Israel Iran Clash: इजराइल पर ईरान के हमले से पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के संकेत, वैश्विक सुरक्षा के लिए भी खतरा बढ़ा
हिजबुल्लाह गाजा युद्ध की शुरुआत से ही उत्तरी इजरायल पर रॉकेट दाग रहा है। गाजा जंग हमास और दूसरे चरमपंथियों की ओर से सात अक्टूबर 2023 को इज़रायल पर आक्रमण करने के बाद शुरू हुई थी। उस हमले में लगभग 1,200 लोगों की मौत हुई थी। हिजबुल्लाह के रॉकेट हमलों ने उत्तरी इजरायल में लगभग 70,000 लोगों को उनके घरों से विस्थापित कर दिया है
Israel Iran Clash: इजराइल पर ईरान के हमले से पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के संकेत
ईरान ने एक अक्टूबर 2024 को इजरायल पर कम से कम 180 बैलेस्टिक मिसाइल दागीं, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस के शब्दों में अगर इसे कहें तो यह ‘‘लगातार बढ़ता जा रहा है।’’ ईरान के हमले को इजरायल ने अपने ‘आयरन डोम’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम और वहां पास में मौजूद अमेरिकी नौसैनिक डिस्ट्रॉयर जहाजों की मदद से काफी हद तक रोक दिया। यह हमला 27 सितंबर को तेहरान समर्थित लेबनानी चरमपंथी समूह हिजबुल्लाह के लंबे समय से नेता रहे हसन नसरल्ला की इजरायली हमले में मौत के बाद हुआ है।
हिजबुल्लाह गाजा युद्ध की शुरुआत से ही उत्तरी इजरायल पर रॉकेट दाग रहा है। गाजा जंग हमास और दूसरे चरमपंथियों की ओर से सात अक्टूबर 2023 को इज़रायल पर आक्रमण करने के बाद शुरू हुई थी। उस हमले में लगभग 1,200 लोगों की मौत हुई थी। हिजबुल्लाह के रॉकेट हमलों ने उत्तरी इजरायल में लगभग 70,000 लोगों को उनके घरों से विस्थापित कर दिया है।
अमेरिका की राजनीति और सोसाइटी संपादक एमी लीबरमैन ने पश्चिम एशिया में तेज होते संघर्ष को बढ़ावा देने वाले जटिल इतिहास और गतिशीलता को बेहतर ढंग से समझने के लिए आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ जावेद अली से बात की।
हाल के हफ्तों में पश्चिम एशिया कितना ज्यादा खतरनाक हो गया है?
पश्चिम एशिया में हालात एक साल पहले से भी ज्यादा अस्थिर हैं। यह संघर्ष मुख्य रूप से इजरायल और हमास के बीच की लड़ाई से आगे तक फैल गया है।
अब, इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच पिछले साल से संघर्ष चल रहा है, जो इजरायल-हमास संघर्ष से भी ज्यादा खतरनाक लगता है।
इन हमलों में मानवीय क्षति बहुत ज्यादा है, क्योंकि लेबनान में 1,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें मरने वालों या घायलों में से कितने वास्तव में हिजबुल्लाह के लड़ाके हैं।
आखिरी बार कब भिड़े थे इजरायल और ईरान?
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच आखिरी बार सीधा युद्ध 2006 में हुआ था, जो 34 दिनों तक चला था और लेबनानी नागरिकों और हिजबुल्लाह लड़ाकों समेत 1,500 से ज़्यादा लोगों की जान गई थी। तब से, इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच छद्म युद्ध जारी है - लेकिन यह इस तरह की तीव्रता वाला नहीं था, जैसा कि हमने सात अक्टूबर के बाद के परिदृश्य में देखा है।
अब, इस संघर्ष के क्षेत्र से बाहर, यहां तक कि विश्व स्तर पर भी फैलने की संभावना है।
इजरायल और हमास और हिजबुल्लाह के संघर्ष से ईरान का क्या संबंध है?
ईरान ने कहा है कि उसने हिजबुल्लाह, हमास और ईरानी सेना पर हमलों के जवाब में इजरायल पर मिसाइलें दागी हैं।
समूहों और संगठनों के गठबंधन को अब ईरान का “एक्सिस ऑफ रिज़िस्टन्स” कहा गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला खामेनी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों ने सभी अलग-अलग तत्वों को एकजुट करने वाले दिशा-निर्देश जारी किए हैं, चाहे वह गाजा पट्टी में हमास हो, यमन में हूती विद्रोही हों, लेबनान में हिजबुल्लाह हों या इराक और सीरिया में शिया मिलिशिया हों।
सात अक्टूबर 2023 से पहले ये सभी समूह वैचारिक रूप से इजरायल के विरोधी थे। मगर वे अपने संघर्ष भी कर रहे थे और हमास का समर्थन करने के लिए एकजुट नहीं थे। अब, वे सभी इजरायल को तबाह करने के एक साझा लक्ष्य के इर्द-गिर्द अधिक सक्रिय हो गए हैं।
ईरान और हिज़्बुल्ला के बीच, विशेष रूप से, गहरे संबंध हैं, जो 1979 में ईरानी क्रांति और इस्लामी गणतंत्र ईरान के निर्माण के समय से चले आ रहे हैं।
क्या है संघर्ष का इतिहास?
साल 1982 में, इजरायल ने फलस्तीनी लिबरेशन संगठन और दूसरे फलस्तीनी समूहों द्वारा इजरायल में किए जा रहे सीमा पार हमलों को विफल करने के लिए दक्षिणी लेबनान पर आक्रमण किया। नवगठित ईरानी आईआरजीसी ने लेबनान के गृह युद्ध में पहले से ही लड़ रहे समान विचारधारा वाले लेबनानी शिया उग्रवादियों के साथ काम करने के लिए दक्षिणी लेबनान में सलाहकार और प्रशिक्षक भेजे।
वे इजरायली सेना और बहुराष्ट्रीय सेना के खिलाफ लड़ना चाहते थे, जिसमें अमेरिकी, फ्रांसीसी और अन्य पश्चिमी सेनाएं शामिल थीं। उन्हें मूल रूप से लड़ाई को समाप्त करने के लिए शांति सैनिकों के रूप में भेजा गया था।
लेबनान में हिज़्बुल्ला लेबनान की समानांतर सरकार है। लेबनानी सरकार की अनुमति से हिज़्बुल्ला एक राज्य के भीतर एक राज्य है, लेकिन सरकार हिजबुल्लाह के सैन्य अभियानों में सहयोग नहीं करती है। वर्तमान में, लेबनानी सेना लेबनान पर इज़राइल के हमलों का जवाब नहीं दे रही है। यह दर्शाता है कि हिज़्बुल्ला कितनी प्रभावशाली ताकत बन गया है।
हिजबुल्लाह पर इजरायल के हमले कितना नुकसान पहुंचाने वाले हैं?
हिजबुल्लाह को अपने लड़ाकों के संदर्भ में स्पष्ट रूप से नुकसान उठाना पड़ा है, लेकिन हिजबुल्लाह हमास से कहीं बड़ा समूह है और लेबनान में कहीं बड़े क्षेत्र में उसका दायरा फैला है। इसके पास हमास की तुलना में कहीं अधिक उन्नत हथियार हैं, तथा एक विशाल लड़ाकू बल है जिसमें 40,000 से 50,000 नियमित बल शामिल हैं, जो एक पारंपरिक सैन्य संरचना में संगठित हैं।