विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने बुधवार को न्यूयॉर्क में स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के स्थायी सदस्य के रूप में नहीं बैठना केवल हमारे लिए नहीं, बल्कि यूएन के लिए भी अच्छा नहीं है। जयशंकर कोलंबिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स के राज सेंटर में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया से बातचीत के दौरान यह बातें कही।
इस दौरान विदेश मंत्री से पूछा गया कि भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने में कितना समय लगेगा? इस सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने कि भारत को स्थायी सदस्यता नहीं मिल पाना न केवल हमारे लिए बल्कि संयुक्त राष्ट्र के लिए भी सही नहीं है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार होना चाहिए।
जयशंकर ने वुधवार को विदेशी जमीन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की वजह ही भारत और अमेरिका के संबंध इतने मजबूत हुए हैं। जयशंकर ने पनगढ़िया से बातचीत से पहले यूनिवर्सिटी को संबोधित करते हुए कहा कि सतर्कता… संदेह और सावधानी से उबरने में कड़ी मेहनत लगी है।
बाइडेन ने भी भारत की स्थाई सदस्यता का किया समर्थन
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भारत, जापान और जर्मनी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का स्थाई सदस्य बनाए जाने का समर्थन किया है। बाइडेन प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बुधवार को न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा कि अभी इस दिशा में बहुत काम किया जाना बाकी है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘हम पहले भी यह मानते थे और आज भी इस बात को मानते हैं कि भारत, जापान और जर्मनी को सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनाया जाना चाहिए।’’
बाइडेन ने कहा कि उनका मानना है कि वक्त आ गया है, जब वैश्विक संस्था को और समावेशी बनाया जाए, ताकि यह आज के युग की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सके। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद के सदस्य, जिनमें अमेरिका भी शामिल है, उन्हें संयुक्त राष्ट्र चार्टर की रक्षा करनी चाहिए और वीटो से बचना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वीटो सिर्फ विशेष अथवा विषम परिस्थितियों में ही होना चाहिए, ताकि परिषद की विश्वसनीयता और उसका प्रभाव बना रहे। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि अमेरिका सुरक्षा परिषद में स्थाई और अस्थायी, दोनों तरह के सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर जोर देता है। इनमें वे देश भी शामिल हैं, जिनकी स्थाई सदस्यता की मांग का हम लंबे समय से समर्थन करते आ रहे हैं।