Operation Shadabad: जानिए किस तरह इजराइली जासूसों ने 2020 में गुप्त ईरानी परमाणु ठिकाने को ध्वस्त कर दिया था

ईरान ने 1 अक्टूबर को ईजराइल पर एक साथ दर्जनों मिसाइलों से हमले किए थे। इसके बाद इजराइल ने अपना रुख और आक्रामक किया है। इजराइल की सेना भले ही हिजबुल्लाह का नामोनिशान मिटाने पर तुली हुई है, लेकिन इजराइल की असली चिंता ईरान के परमाणु बम हैं

अपडेटेड Oct 06, 2024 पर 5:34 PM
ईरान इंटरनेशनल ने इजराइल के गुप्त ऑपरेशन का खुलासा 24 मार्च, 2024 को किया था। इसके तहत इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकाने को नष्ट कर दिया था। (सांकेतिक फोटो)

इजराइल हिजबुल्लाह को खत्म करने पर आमादा है। लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों को नष्ट करने के लिए वह हवाई और जमीनी हमले कर रहा है। 1 अक्टूबर को ईरान के मिसाइल हमलों के बाद उसने अपना रुख और आक्रामक कर दिया है। इजराल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बार-बार कहा है कि ईरान को इसके नतीजे भुगतने होंगे। उन्होंने यहां तक कहा है कि मध्यपूर्व का कोई इलाका इजराइली सेना की मारक क्षमता से बाहर नहीं है।

इजराइल की असली चिंता ईरान के परमाणु बम हैं

इजराइल की सेना भले ही हिजबुल्लाह (Hezbollah) का नामोनिशान मिटाने पर तुली हुई है, लेकिन इजराइल की असली चिंता ईरान के परमाणु ठिकाने (Iran nuclear facilities) हैं। यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इंटरनेशनल एटोमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने ईरान के एक गुप्त परमाणु हथियार कार्यक्रम के बारे में आगाह किया था।


समझौता टूटने पर 2018 में ईरान बेलगाम हो गया

करीब एक दशक पहले ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों को सीमित करने को तैयार हो गया था। इसके एवज में उसने पश्चिमी देशों से उस पर लगे प्रतिबंध हटाने की शर्त रखी थी। अमेरिका की अगुवाई में इस समझौते पर ईरान ने हस्ताक्षर किए थे। लेकिन, 2018 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते की शर्तों पर असंतोष जताते हुए अमेरिका को इससे अलग कर लिया था। इसके जवाब में ईरान भी अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों को सीमित रखने की शर्त के पालन से पीछे हट गया था।

ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को दुनिया की निगाहों से बचाए रखा

तब से ईरान लगातार अपनी परमाणु क्षमता बढ़ा रहा है। उसने करीब तीन परमाणु बम बनाने की क्षमता हासिल कर ली है। उसके परमाणु कार्यक्रम और बम बनाने से जुड़ी गतिविधियां इतनी गुप्त तरीके से चलाई जाती रही हैं कि दुनिया को इनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। हालांकि, इजराइल समय-समय पर ईरान के परमाणु ठिकानों को ध्वस्त करने की कोशिश करता रहा है। लेकिन, उसके ये ऑपरेशन दुनिया की निगाहें में नहीं आए हैं। इजराइल बहुत गोपनीय तरीकों से इन्हें अंजाम देता रहा है।

इजराइल ने जुलाई 2020 में एक परमाणु ठिकाने को ध्वस्त किया था

ईरान इंटरनेशनल ने इजराइल के ऐसे ही एक गुप्त ऑपरेशन का खुलासा 24 मार्च, 2024 को किया था। यह ऑपरेशन जुलाई 2020 में अंजाम दिया गया था। इसमें ईरान के एटोमिक एनर्जी ऑर्गेनाइजेशन (AEOI) के एक इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन वर्कशॉप को ध्वस्त कर दिया गया था। ईरान इंटरनेशनल के खुलासे से पहले इस ऑपरेशन के बारे में किसी को पता नहीं था। हैकिंग में ईरान के कुछ ज्यूडिशियल और इंटेलिजेंस डॉक्युमेंट्स के लीक होने के बाद दुनिया को इस ऑपरेशन के बारे में पता चला।

शाहाबाद वर्कशॉप नष्ट करने का ऑपरेशन मोसाद ने अंजाम दिया था

ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट में बताया गया था कि इजराइली इंटेलिजेंस एजेंसी मोसाद (Mosad) ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इसके लिए 9 ईरानी नागरिकों को मुंहमांगी रकम ऑफर की गई थी। उन्हें शाहाबाद वर्कशॉप का ब्लूप्रिंट उपलब्ध कराया गया। उन्हें कहा गया कि इसमें आग लगाने पर उन्हें मुंहमांगी कीमत दी जाएगी। बताया जाता है कि ऑपरेशन से पहले उन्हें करीब 10,000 डॉलर दिए गए थे। बाकी पैसे ऑपरेशन पूरा होने के बाद देने का वादा किया गया था।

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ईरान ने शाहाबाद वर्कशॉप के बारे में IAEA को भी नहीं बताया था

शाहाबाद वर्कशॉप वह फैसिलिटी थी, जिसके बारे में सिर्फ ईरान को पता था। ईरान ने यहां तक कि इसे IAEA की नजरों से भी बचा कर रखा था। यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चुने गए ईरानी हमलावरों का नेतृत्व मसूद रहीमी और उसके भाइयों ने की थी। वे गार्ड्स को निष्क्रिय कर शाहाबाद वर्कशॉप के अंदर घुसने में कामयाब हो गए थे। फिर उन्होंने वर्कशॉप के अंदर इस्तेमाल हो रहे कई उपकरणों को आग के हवाले कर दिया था।

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