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अब पाकिस्तान में मंत्रियों और अधिकारियों के खर्च पर चली कैंची, IMF ने कर्ज के लिए रखी थी शर्त

पाकिस्तान की सरकार एक के बाद एक IMF की हर शर्त पूरी करने की कोशिश कर रही है। इसकी वजह यह है कि उसके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है। अगर आईएमएफ से कर्ज नहीं मिला तो पाकिस्तान की इकोनॉमी डूब जाएगी। पहले से ही बढ़ती महंगाई की वजह से वहां के लोगों की जिंदगी नर्क बन चुकी है

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Feb 23, 2023 पर 11:41 AM
अब पाकिस्तान में मंत्रियों और अधिकारियों के खर्च पर चली कैंची, IMF ने कर्ज के लिए रखी थी शर्त
धानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि केंद्र सरकार के सभी मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों को अपने खर्च में 15 फीसदी तक कटौती करने को कहा गया है।

पाकिस्तान सरकार (Pakistan Government) ने एक और कड़ा फैसला लिया है। आम आदमी के बाद अब मंत्रियों और बड़े अधिकारियों की बारी है। सरकार मंत्रियों, अफसरों और सलाहकारों के अलाउन्सेज और यात्रा भत्तों में कटौती करने जा रही है। खर्च घटाने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे एक साल में 200 अरब रुपये की बचत होगी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद इस बारे में बुधवार को बताया। उन्होंने कहा कि IMF ने कर्ज देने के लिए कई शर्तें रखी थी। इनमें यह शर्त भी शामिल थी।

IMF से कर्ज लेने के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने पाकिस्तान को कर्ज देने के लिए कई कड़ी शर्तें रखी हैं। चूंकि पाकिस्तान के बाद अपनी इकोनॉमी को डूबने से बचाने के लिए दूसरा कोई रास्ता नहीं है, इसलिए वह IMF की सभी शर्तें मान रहा है। अगर पाकिस्तान को आईएमएफ से कर्ज नहीं मिला तो वह गंभीर संकट में फंस जाएगा। उसकी अर्थव्यवस्था डूब जाएगी। इसकी वजह यह है कि उसके पास विदेशी मुद्रा बहुत कम बचा है। इनफ्लेशन का स्तर आसमान में पहुंच चुका है। दूध, ब्रेड, आटा जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम आम आदमी के पहुंच से बाहर निकल चुके हैं। इससे लोगों में जबर्दस्त गुस्सा है। आए दिन लोग सड़कों पर उतर अपने गुस्से का इजहार कर रहे हैं।

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