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Russia-Ukraine War: आखिर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ताकत का राज क्या है?

रूस के पूर्व राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन (Boris yeltsin) ने मार्केट को बंदिशों से मुक्त करने और रूस को एक लोकतांत्रिक देश बनाने की कोशिशें शुरू की थी। वह सोवियत यूनियन के पूर्व राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव (Mikhail Gorbachev) के ग्लासनोस्त (Glasnost) और पेरेसत्रोइका (Perestroika) के समर्थक थे

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 07, 2022 पर 5:16 PM
Russia-Ukraine War: आखिर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ताकत का राज क्या है?
पुतिन ने सत्ता में आने के बाद सुधारों का सिलसिला शुरू किया।

1990 के दशक में रूस के पूर्व राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन (Boris yeltsin) ने मार्केट को बंदिशों से मुक्त करने और रूस को एक लोकतांत्रिक देश बनाने की कोशिशें शुरू की थी। वह सोवियत यूनियन के पूर्व राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव (Mikhail Gorbachev) के ग्लासनोस्त (Glasnost) और पेरेसत्रोइका (Perestroika) के समर्थक थे। ग्लासनोस्त का मतलब है खुलापन और पेरेसत्रोइका का मतलब है पुनर्निर्माण। सोवियत रूस के विघटन के बाद रूस की बागडोर येल्तसिन के हाथ में थी।

आर्थिक सुधार की येल्तसिन की कोशिशें बुरी तरह से नाकाम रहीं। रूस में भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया, संपत्ति कुल लोगों के हात में केंद्रित हो गई और आम लोगों की जिंदगी बहुत तकलीफदेह हो गई। हाल में नोमुरा इनवेस्टमेंट फोरम एशिया में रिसर्च इंस्टीट्यूट के चीफ इकोनॉमिस्ट रिचर्च कू ने एक प्रजेंटेशन दिया। इसमें बताया गया कि कैसे येल्तसिन के सुधारों की वजह से रूस में प्रति व्यक्ति जीडीपी में गिरावट आई।

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कू ने यह भी बताया कि कैसे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के रूस के राष्ट्रपति बनने के बाद लोगों की इनकम नाटकीय रूप से बढ़ी। येल्तसिन के समय में जो प्रति व्यक्ति जीडीपी करीब दो-तिहाई गिर गई थी, वह पुतिन के कार्यकाल में 12 गुना तक बढ़ गई।

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