रूस (Russia) के लोग यूक्रेन (Ukraine) पर हमले के खिलाफ हैं। रूस की एक पर्वतारोही ने इस हमले का विरोध अनोखे तरीके से किया है। उसने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर पहुंचने के बाद यूक्रेन का झंडा फहराया। हिमालय की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर पहुंचना किसी पर्वतारोही की सबसे बड़ी सफलता मानी जाती है।
आम तौर पर पर्वतारोही इस चोटी पर पहुंचने के बाद अपने देश का झंडा लहराते हैं। नेपाल स्थित हिमायल की इस चोटी को फतह करने के लिए हर साल दुनियाभर के हजारों पर्वतारोही काठमांडु पहुंचते हैं।
कात्या लिपका (Katya Lipka) पर्वतारोही के साथ-साथ एक ब्लॉगर भी हैं। उन्होंने माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) पर चढ़ने की अपनी तस्वीर सोशल मीडिया वेबसाइट इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। उन्होंने पिछले हफ्ते शुक्रवार को यह पोस्ट शेयर किया। हालांकि, वह 24 मई को माउंट एवरेस्ट पर पहुंची थीं। संयोग से इसी तारीख को यूक्रेन पर रूस के हमले के तीन महीने पूरे हुए।
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना दुनियाभर के पर्वतारोहियों का सपना होता है। 8,848 मीटर ऊंची इस चोटी पर चढ़ने के लिए स्वस्थ शरीर, शारीरिक ताकत, कठिन अभ्यास और ज्यादा मनोबल जरूरी होता है। लिपका ने कहा है कि माउंट एवरेस्ट पर उनकी उंगलियां बहुत ज्यादा ठंड की वजह से ठीक से काम नहीं कर रही थीं। वह बहुत मुश्किल से यूक्रेन का झंडा थामे हुए हैं। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर यूक्रेन-रूस लड़ाई खत्म होने की दुआ मांगी। अपने पोस्ट में उन्होंने रूस से यूक्रेन में निर्दोष लोगों की हत्या बंद करने की भी अपील की हैं।
लिपका ने यूक्रेन का झंडा फहराने के साथ ही एलेक्सी नेवलनी के समर्थन में नारे भी लगाए। नेवलनी को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कट्टर विरोधी माना जाता है। रूस की सरकार ने उन्हें काफी समय से जेल में डाल रखा है। रूस की सरकार पुतिन के विरोधियों को जेल में डाल देती है।
रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला शुरू किया था। तब से यह लड़ाई जारी है। दुनियाभर में इसका विरोध हो रहा है। इस युद्ध ने यूक्रेन को तबाह कर दिया है। हजारों लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। यूक्रेन के 60 लाख से ज्यादा लोग पड़ोस के देशों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं।