‘समुद्री लुटेरों की दुनिया’ के समान है क्रिप्टोकरेंसी, जानिए CEA अनंत नागेश्वरन क्यों कहा ऐसा

देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी को अभी एक फिएट करेंसी का टेस्ट पास करना भी बाकी है

अपडेटेड Jun 10, 2022 पर 12:23 PM
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वी अनंत नागेश्वरन, मुख्य आर्थिक सलाहकार

V Anantha Nageswaran : देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि एक केंद्रीय रेगुलेटरी अथॉरिटी के बिना क्रिप्टोकरेंसी “एक समुद्री लुटेरों की दुनिया” के समान है। साथ ही इसे अभी एक फिएट करेंसी का टेस्ट पास करना भी बाकी है।

उन्होंने कहा कि फिएट मनी की तुलना में क्रिप्टोकरेंसी स्टोर वैल्यू, व्यापक स्वीकार्यता और मौद्रिक इकाई जैसी बुनियादी जरूरतों पर खरी नहीं उतरती है।

समुद्री लुटेरों की दुनिया है क्रिप्टोकरेंसी


उन्होंने कहा, “वे ज्यादा डिसेंट्रलाइज्ड हो गई हैं और वाचडॉग या एक सेंट्रलाइज्ड रेगुलेटरी अथॉरिटी के नहीं होने का मतलब है कि यह एक समुद्री लुटेरों की दुनिया के समान है। जहां पर जीतने वाला सब कुछ ले जाता है।”

डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (DeFI) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, भले ही इसे इनोवेशन माना जाता है, लेकिन मैं इस पर अपना निर्णय सुरक्षित रखूंगा कि क्या यह वास्तव में इनोवेशन है या यह कुछ ऐसा है, जिस पर हमें पछतावा होगा।’

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आरबीआई के डिप्टी गवर्नर के साथ जताई सहमति

उन्होंने एसोचैम के एक कार्यक्रम में कहा कि वह रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर (T Ravi Shankar) से सहमत हैं, जिन्होंने क्रिप्टोकरेंसी और डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस के संबंध में कहा था वास्तविक फाइनेंशियल इनोवेशन के बजाय नियामकीय मध्यस्थता का मामला अधिक लग रहा है।

फिएट करेंसीज के विकल्प पर उन्होंने कहा, ‘क्रिप्टो करेंसी को अभी कई उद्देश्यों पर खरा उतरना होगा। इसकी एक स्टोर वैल्यू होनी चाहिए। इसकी व्यापक स्वीकार्यता होनी चाहिए और यह एक मौद्रिक इकाई होनी चाहिए। इस लिहाज से क्रिप्टो या DeFI जैसे नए इनोवेशन को अभी टेस्ट पास करनी बाकी है।’

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क्रिप्टोकरेंसी पर एक परामर्श पत्र तैयार कर रही है सरकार

सरकार क्रिप्टोकरेंसी के संबंध में एक परामर्श पत्र पर काम कर रही है और विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) सहित विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से सुझाव ले रही है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है कि पिछले चार वर्षों की वृद्धि, मुद्रास्फीति तथा रुपये की स्थिरता के रूप में मिला लाभ कम न हो। नागेश्वरन ने अर्थव्यवस्था के बारे में कहा कि सरकार चार चीजों- राजकोषीय घाटा, आर्थिक वृद्धि, गरीब व कम आय वाले परिवारों के लिए आजीविका की लागत को कम रखना और रुपये को बहुत अधिक कमजोर होने से रोकने के बीच संतुलन बनाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है।

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