सऊदरी अरामको (Saudi Arab) दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का प्लान बना रही है। वह अपनी ट्रेडिंग सब्सिडियरी को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराएगी। दरअसल, अभी क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमत उछाल पर है। वह इसका फायदा उठाना चाहती है। बताया जाता है कि सऊदी अरामको इसी साल यह आईपीओ लॉन्च कर सकती है। मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी है। सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी है। इसमें सऊदी अरब सरकार की हिस्सेदारी है।
सऊदी अरामको अपनी सब्सिडियरी अरामको ट्रेडिंग कंपनी (Aramco Trading Company) की लिस्टिंग के लिए कई मर्चेंट बैंकों से बात कर रही है। इनमें गोल्डमैन सैक्स ग्रुप, जेपी मॉर्गन चेज एंड कंपनी और मॉर्गन स्टेनली शामिल हैं। अरामको ट्रेडिंग की वैल्यूएश 30 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकती है।
सऊदी अरामको अपनी सब्सिडियरी में 30 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकती है। इस तरह यह इस साल के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है। इस साल जनवरी में दक्षिण कोरिया की एलजी एनर्जी ने आईपीओ से करीब 10.8 अरब डॉलर जुटाए थे।
सऊदी अरामको अपनी ट्रेडिंग सब्सिडियरी की वैल्यू अनलॉक करना चाहती है, जबकि दुनिया की ज्यादातर ऑयल कंपनियां अपनी ट्रेडिंग सब्सिडियरी के बारे में जानकारियां सावर्जनिक नहीं करना चाहती है। दरअसल, ट्रेडिंग सब्सिडियरी के जरिए ही ऑयल कंपनियों को कमाई होती है। इसलिए ट्रेडिंग सब्सिडियरी की लिस्टिंग नहीं कराती हैं।
इस मामले की जानकारी देने वाले सूत्रों ने बताया कि अभी सऊदी अरामको अपनी सब्सिडियरी की लिस्टिंग के फायदे-नुकसान को जानने की कोशिश कर रही है। गोल्डमैन सैक्स और जेपी मॉर्गन स्टेनली के प्रतिनिधियों ने इस बारे में ज्यादा बताने से इनकार कर दिया। अरामको ट्रेडिंग और सऊदी अरामको के प्रवक्ताओं ने भी इस मसले पर तुरंत कुछ भी नहीं कहा।
मिडिल-ईस्ट की एनर्जी कंपनियां ऑयल प्राइसेज में आए उछाल का फायदा उठाना चाहती हैं। मध्य-पूर्व देशों की सरकारें ऑयल पर अपनी निर्भरता घटाना चाहती हैं। वे अपने देश में फॉरेन इनवेस्टर्स को अट्रैक्ट करना चाहती हैं। ब्लूमबर्ग न्यूज ने पिछले महीने खबर दी थी कि सऊदी अरामको अपनी रिफाइनरी कंपनी लुबेरेफ को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराने के बारे में सोच रही है।
सऊदी अरामको की कई सहायक कंपनियां स्टॉक मार्केट में लिस्टेड हैं। इनमें केमिकल कंपनी सऊदरी बेसिक इंडस्ट्रीज कॉर्प और राबिग रिफाइनिंग एंड पेट्रोकेमिकल कंपनी शामिल हैं। यूएई की ऑयल कपनी ने भी यही रणनीति अपनाई है। उसने पिछले साल अपनी ड्रिलिंग और फर्टिलाइजर कंपनियों को स्टॉक मार्केट में लिस्ट कराया है।